दिवाली पूजा
इस वर्ष कार्तिक अमावस्या दो दिन यानी 20 और 21 अक्टूबर को पड़ रही है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अमावस्या 20 अक्टूबर दोपहर 3:44 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर शाम 5:55 बजे तक रहेगी. ऐसे में किस दिन दिवाली मनाना सर्वोत्तम होगा, इसे लेकर लोगों में कंफ्यूजन है. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त के लिए प्रदोष और निशीत काल में पूजा करना सबसे अच्छा माना जाता है.
कब से शुरू होता है प्रदोष काल ?
प्रदोष काल मां लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, यह सूर्यास्त के बाद शुरू होता है. निशीथ काल (मध्य रात्रि) में की गई पूजा से भी विशेष लाभ प्राप्त होते हैं, खासकर दिवाली जैसे शुभ अवसर पर.
क्या रहेगा दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त ?
इस बार दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा के लिए ये विशेष मुहूर्त बताए गए हैं:
• प्रदोष काल: शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक
• वृषभ काल: शाम 7:08 बजे से रात 9:03 बजे तक
• सर्वोत्तम मुहूर्त: शाम 7:08 बजे से रात 8:18 बजे तक, इस समय लगभग 1 घंटा 11 मिनट पूजा के लिए विशेष रूप से अनुकूल रहेगा.
ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस समय पूजा करने से घर में धन-समृद्धि, सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है. साथ ही, दीपावली के दिन घर और कार्यस्थल को रोशनी और रंग-बिरंगे दीपकों से सजाना शुभ और कल्याणकारी माना जाता है. इस दिवाली अपने घर को प्रकाश, समृद्धि और खुशियों से भरें और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करें.
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