आज पूरी दुनिया की नजरें आसमान की ओर टिकी हैं, लेकिन इसका कारण कोई खगोलीय घटना नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप का एक नया और चौंकाने वाला आदेश है। ट्रंप ने ‘एरिया 51’ और UFO से जुड़ी तमाम सीक्रेट फाइलों को सार्वजनिक करने का फरमान जारी कर दिया है। जहाँ एक तरफ डिफेंस एक्सपर्ट्स के होश उड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ सवाल उठ रहा है क्या सच में एलियंस धरती पर आ चुके हैं, या यह सिर्फ एक राजनीतिक ‘पॉइंट डाइवर्जन’ है?
क्या है एरिया 51?
नेवादा के वीरान रेगिस्तान में स्थित ‘एरिया 51’ दशकों से रहस्य का केंद्र रहा है। 1947 के रोसवेल हादसे के बाद से ही यह थ्योरी मशहूर है कि यहाँ एलियंस के मलबे और उनकी ‘डेड बॉडीज’ पर रिवर्स इंजीनियरिंग की जा रही है। 2013 में CIA ने इसकी मौजूदगी तो स्वीकार की, लेकिन इसे केवल एक टेस्टिंग ग्राउंड बताया। ट्रंप का दावा है कि ओबामा और ‘डीप स्टेट’ ने जनता से जो सच छिपाया, वह उसे सामने लाएंगे।
क्या ये है ध्यान भटकाने की रणनीति?
सिक्के का दूसरा पहलू देखें तो ट्रंप इस वक्त कई मोर्चों पर घिरे हुए हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ नीति को असंवैधानिक करार देना उनकी साख पर बड़ी चोट थी। इसके जवाब में ट्रंप ने ‘सेक्शन 122’ लागू कर पूरी दुनिया पर 10% फ्लैट टैक्स ठोक दिया है, जिससे भारत समेत कई देशों में महंगाई का खतरा मंडरा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब जनता महंगाई और टैक्स से त्रस्त होने लगी, तभी अचानक ‘एलियंस’ का मुद्दा छेड़ दिया गया। इसे राजनीति में ‘Wag the Dog’ स्ट्रेटेजी कहते हैं यानी अपनी विफलताओं और कानूनी पचड़ों को छिपाने के लिए एक बहुत बड़ा तमाशा खड़ा करना।
एपस्टीन फाइल्स और अंतरराष्ट्रीय दबाव
सबसे डार्क एंगल ‘जेफ्री एपस्टीन’ केस की उन 30 लाख फाइलों का है, जिनके खुलने से दुनिया के सबसे रसूखदार लोगों की कुर्सी हिल सकती है। चर्चा है कि इन फाइलों में ट्रंप और उनके करीबियों के नाम शामिल हैं।