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हिंदू पत्नी, क्रिश्चियन पति और धर्म की जंग! J.D. Vance ने उषा वेंस पर दिया ऐसा बयान, जो बन गया ग्लोबल हेडलाइन!

वाशिंगटन. अमेरिका के उप-राष्ट्रपति पद के दावेदार जेडी वेंस  ने एक बयान देकर दुनिया में हलचल मचा दी है, जिसने प्यार, धर्म और राजनीति के समीकरणों को एक साथ उलझा दिया है. वेंस ने कहा है कि ‘उन्हें पूरा विश्वास है कि उनकी पत्नी उषा वेंस एक दिन ईसाई बनेंगी’. ये बयान सुनते ही जैसे अमेरिका से लेकर भारत तक बहस छिड़ गई.

हिंदू पत्नी को ईसाई बनाना चाहते हैं वेंस?

J.D. Vance ने एक इंटरव्यू में अपनी पत्नी उषा वेंस के धर्म को लेकर यह बेबाक टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि ‘मेरा मानना है कि मेरी पत्नी एक दिन ईसाई बनेंगी. वह हर रविवार मेरे साथ चर्च आती हैं, और मैं चाहता हूं कि वह भी मसीह के रास्ते पर चलें’.

हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर उषा कभी धर्म नहीं बदलती हैं, तो भी उनका प्यार कम नहीं होगा। उन्होंने कहा, “अगर वो कभी ईसाई नहीं भी बनतीं, तो भी मैं उनसे उतना ही प्यार करूंगा. लेकिन हां, मैं चाहता हूं कि वो मसीह को जानें.

कौन हैं उषा वेंस?

उषा वेंस भारतीय मूल की हैं और एक रूढ़िवादी हिंदू परिवार से आती हैं. उनकी मुलाकात J.D. Vance से येल लॉ स्कूल में हुई थी. यह कपल अंतर-धार्मिक विवाह  का एक बेहतरीन उदाहरण माना गया था.

शादी के बाद भी उषा ने अपना धर्म नहीं बदला, लेकिन वह अपने पति के साथ चर्च के कार्यक्रमों में नियमित रूप से हिस्सा लेती हैं. लेकिन अब वेंस का यह बयान अब उनके निजी धार्मिक चुनाव पर एक सार्वजनिक सवाल बनकर रह गया.

क्या ये वोट बैंक की राजनीति है?

धार्मिक रूप से संवेदनशील अमेरिका में, किसी बड़े नेता का ऐसा बयान बिना राजनीतिक मायने के नहीं हो सकता. राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि J.D. Vance का यह बयान उनके रूढ़िवादी क्रिश्चियन वोट बैंक को मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है.

भारत और अमेरिका में इसकी तीखी निंदा

वेंस के इस बयान को व्यक्तिगत आस्था के बजाय राजनीतिक और धार्मिक श्रेष्ठता से प्रेरित बताया जा रहा है. हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन के निदेशक ने इसे ‘अपमानजनक’ बताते हुए कहा कि ‘वेंस ने यह कहकर हिंदू परंपराओं का अपमान किया है कि वह पर्याप्त अच्छी नहीं हैं’.

सोशल मीडिया पर भारतीय-अमेरिकी समुदाय और कई भारतीय यूज़र्स ने कहा कि यह बयान अंतर-धार्मिक रिश्तों के सम्मान के खिलाफ है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए. आलोचकों का मानना है कि यह टिप्पणी उनकी पत्नी के निजी धार्मिक चुनाव के अधिकार का हनन है.

यह केवल एक पति-पत्नी के रिश्ते की नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर में अंतर-धार्मिक विवाहों में आस्था और पहचान के मुद्दों पर एक नई बहस शुरू कर रही है.

news desk

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