अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है और हालात और ज्यादा बिगड़ते हुए नजर आ रहे हैं। भले ही दोनों देशों के बीच ओमान में एक अहम बैठक हुई, लेकिन बातचीत अभी तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है। बातचीत जरूर हुई और माहौल को ‘अच्छी शुरुआत’ बताया गया, लेकिन ईरान ने अपनी लाल रेखा खींच दी है। परमाणु मुद्दे के अलावा वह किसी अन्य विषय पर चर्चा के लिए तैयार नहीं है। न उसके मिसाइल कार्यक्रम पर, न क्षेत्रीय गुटों के समर्थन पर और न ही इज़रायल से जुड़ी चिंताओं पर। इन सभी सवालों पर ईरान का जवाब एक ही है—ये बातचीत के दायरे में नहीं आते।
इसी सख्त रुख के चलते इज़रायल की बेचैनी बढ़ गई है। हालात की गंभीरता को देखते हुए इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका दौरे पर जा रहे हैं, जहां वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करने की तयारी में है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ शब्दों में कहा है कि न्यूक्लियर एनरिचमेंट ईरान का “अविभाज्य अधिकार” है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने ईरानी ज़मीन पर कोई हमला किया, तो मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाने पर होंगे। इस तरह बातचीत के साथ-साथ सख्त संदेश भी खुले तौर पर दे दिया गया।
अराघची ने यह भी माना कि ओमान में हुई बातचीत एक “अच्छी शुरुआत” रही और परिस्थितियां ऐसी बनीं कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से हाथ मिलाने का मौका भी मिला। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भरोसा कायम होने में अभी लंबा वक्त लगेगा। ईरान की शर्तें पहले की तरह ही सख्त बनी हुई हैं।
वहीं, ईरान के आम नागरिक इस बातचीत को लेकर खास उत्साहित नहीं दिख रहे हैं। तेहरान में कई लोगों का मानना है कि पहले की तरह यह वार्ता भी बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो सकती है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं।
बता दे कि अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार (6 फरवरी) को ईरान में मौजूद अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी। इससे आशंका जताई जा रही है कि अगर बातचीत नाकाम होती है तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इसी संभावित खतरे को देखते हुए ईरान पूरी तरह सतर्क हो गया है।
ईरान सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए कई इलाकों में सड़कों को ब्लॉक करने की तैयारी शुरू कर दी है और कुछ जगहों पर यह कदम उठाया भी जा चुका है। इसके साथ ही हवाई यात्रा को सीमित करने पर भी विचार किया जा रहा है।
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