इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अमेरिका बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका जल्द ही ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंध हटाने पर विचार कर रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई बढ़ सकती है और कीमतों में गिरावट आ सकती है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को संकेत दिए कि ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बड़ी मात्रा में ईरानी तेल टैंकरों में फंसा हुआ है, और अगर प्रतिबंध हटते हैं तो यह तेल बाजार में आएगा, जिससे सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव कम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरानी तेल की एंट्री दोबारा ग्लोबल मार्केट में होती है, तो कच्चे तेल के दाम काबू में आ सकते हैं। इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा, खासकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत के रूप में।
हालांकि, इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर भी पड़ सकता है, क्योंकि ईरान से जुड़े प्रतिबंध लंबे समय से वैश्विक रणनीति का हिस्सा रहे हैं।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अमेरिका बड़ा फैसला ले सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि समुद्र में फंसे करीब 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध जल्द हटाए जा सकते हैं।अमेरिका के संकेत से ग्लोबल सप्लाई बढ़ेगी, 10-14 दिनों तक मिल सकती है राहत
Fox Business Network के “Mornings with Maria” कार्यक्रम में बेसेंट ने कहा कि यह तेल फिलहाल टैंकरों में रुका हुआ है और प्रतिबंध हटने के बाद इसे ग्लोबल मार्केट में उतारा जा सकता है। उनके मुताबिक, यह मात्रा लगभग 10 दिनों से लेकर दो हफ्तों की सप्लाई के बराबर है।
उन्होंने बताया कि अगर इस ईरानी तेल को वैश्विक सप्लाई में शामिल किया जाता है, तो इससे अगले 10 से 14 दिनों तक कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि अगर इस ईरानी तेल को वैश्विक सप्लाई में शामिल किया जाता है, तो इससे अगले 10 से 14 दिनों तक कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने में मदद मिल सकती है।
गौरतलब है कि पिछले दो हफ्तों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। इसकी बड़ी वजह Strait of Hormuz का बंद रहना है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल ट्रांसपोर्ट होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह प्रतिबंध हटता है, तो बाजार में सप्लाई बढ़ेगी और तेल की कीमतों पर दबाव कम होगा, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई को भी राहत मिल सकती है।
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