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US Iran War: तेहरान पहुंचे आसिम मुनीर, पेजेशकियन ने ट्रंप को सुनाई खरी-खरी; बातचीत से पहले रखी शर्त

तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को खत्म कराने की पाकिस्तान की कोशिशों के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तेहरान पहुंचे हैं। मुनीर की यात्रा को दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इसी दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका के सामने अपनी स्थिति साफ कर दी है।

पेजेशकियन ने मुनीर से मुलाकात के दौरान कहा कि वॉशिंगटन को ईरान के साथ बातचीत करते समय अपना लहजा और नजरिया बदलना होगा। ईरानी पक्ष का कहना है कि दबाव और धमकी के जरिए बातचीत को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।

पेजेशकियन ने कहा- अमेरिका को बदलना होगा अपना रवैया

ईरानी मीडिया के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि अमेरिका को तेहरान के साथ व्यवहार करते समय अपने दृष्टिकोण में बदलाव करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जबरदस्ती और दादागिरी पर आधारित रवैया बातचीत और उसके अमल की प्रक्रिया को और जटिल बना देगा। पेजेशकियन का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।

आसिम मुनीर को ट्रंप ने भी किया था फोन

आसिम मुनीर की ईरान यात्रा से करीब एक सप्ताह पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनसे फोन पर बातचीत की थी। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख से ईरान को फिर से बातचीत की मेज पर लाने में मदद करने को कहा था।

ट्रंप की यह बातचीत ऐसे समय हुई थी जब अमेरिका ने दूसरे देशों को ईरान को आर्थिक मदद या सहयोग देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी थी।

इससे संकेत मिलता है कि वॉशिंगटन भी पाकिस्तान की मध्यस्थता को ईरान तक पहुंच बनाने के एक संभावित माध्यम के तौर पर देख रहा है।

ईरान ने अमेरिका के सामने रखी बड़ी शर्त

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, आसिम मुनीर की बार-बार होने वाली यात्राएं इस बात का संकेत हैं कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संवाद स्थापित कराने में अहम भूमिका निभा रहा है।

हालांकि, तेहरान ने बातचीत आगे बढ़ाने से पहले अमेरिका के सामने एक शर्त रखी है। ईरान का कहना है कि अमेरिका को पहले ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ के तहत किए गए अपने पुराने वादों को पूरा करना होगा।

ईरानी पक्ष का दावा है कि इन समझौतों पर अमेरिका ने हस्ताक्षर तो किए थे, लेकिन उनकी शर्तों को लागू नहीं किया गया।

पाकिस्तान की मध्यस्थता पर टिकी नजरें

आसिम मुनीर की तेहरान यात्रा को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए किसी संभावित बातचीत की तलाश जारी है। पाकिस्तान पहले भी दोनों पक्षों के बीच संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर चुका है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुनीर की तेहरान यात्रा अमेरिका और ईरान को दोबारा बातचीत की मेज तक ला पाएगी? फिलहाल ईरान ने बातचीत के लिए अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि पहले अमेरिका को अपने व्यवहार और पुराने समझौतों को लेकर कदम उठाने होंगे।

news desk

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