Trending News

US-Iran Talks Fail: क्या है वो ‘लीबिया मॉडल’ जिसके कारण अमेरिका को इस्लामाबाद से खाली हाथ लौटना पड़ा?

इस्लामाबाद/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच शांति की उम्मीदें एक बार फिर धराशायी हो गई हैं। इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद ईरानी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि वार्ता अमेरिका की “अवैध मांगों” के कारण विफल हुई। इस विफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण है ‘लीबिया मॉडल’ (Libya Model), जिसे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान पर थोपना चाहता है।

क्या है लीबिया मॉडल, जिससे डरता है ईरान?

लीबिया मॉडल साल 2003 के उस समझौते पर आधारित है, जिसके तहत तत्कालीन नेता मुअम्मर गद्दाफी ने अपने परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला किया था। अमेरिका अब इसी फॉर्मूले को ईरान पर लागू करना चाहता है।

इस मॉडल की मुख्य शर्तें

  • पूर्ण सरेंडर: ईरान को अपना पूरा संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) और परमाणु तकनीक अमेरिका या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को सौंपनी होगी।
  • भविष्य पर पाबंदी: तेहरान को भविष्य में कभी भी परमाणु अनुसंधान या कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति नहीं होगी।
  • खुला निरीक्षण: अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को ईरान की किसी भी साइट पर जाकर कभी भी तलाशी लेने की छूट होगी।

नेतन्याहू और ट्रंप की ‘त्रिपोली’ रणनीति

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद स्पष्ट किया था कि वह ईरान के साथ वैसा ही समझौता चाहते हैं जैसा 2003 में त्रिपोली (लीबिया) के साथ हुआ था। रिपब्लिकन सीनेटर टॉम कॉटन भी लंबे समय से इस रणनीति की वकालत करते रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि सैन्य बल के बजाय कूटनीतिक दबाव से ईरान को ‘पंगु’ बनाया जा सकता है।

ईरान को क्यों है ‘गद्दाफी’ जैसा अंजाम होने का डर?

अमेरिका ने ईरान को लालच दिया है कि यदि वह परमाणु कार्यक्रम बंद करता है, तो उसे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से राहत और भारी आर्थिक मदद दी जाएगी। लेकिन ईरान के लिए यह समझौता ‘मौत के वारंट’ जैसा है।

इतिहास का सबक: 2003 में परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के कुछ साल बाद ही गद्दाफी को सत्ता से बेदखल कर उनकी हत्या कर दी गई थी।

सुरक्षा कवच: ईरान के रणनीतिकारों का मानना है कि परमाणु क्षमता ही उनका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। इसे खोने का मतलब है देश की संप्रभुता को हमेशा के लिए खतरे में डालना।

इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के बाद अब खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है। ईरान का साफ कहना है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन “आत्मसमर्पण” की शर्तों पर नहीं। वहीं, अमेरिका का ‘लीबिया मॉडल’ पर अड़े रहना यह संकेत देता है कि कूटनीति के रास्ते अब लगभग बंद हो चुके हैं।

news desk

Recent Posts

उत्तर प्रदेश में सौर ऊर्जा को नई रफ्तार, टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी ने शुरू किया ‘घर-घर सोलर अभियान’

लखनऊ: उत्तर प्रदेश को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक…

10 hours ago

सिगरेट छोड़ना इतना मुश्किल क्यों? 95% लोग फिर पकड़ लेते हैं धूम्रपान की आदत, विशेषज्ञों ने बताई बड़ी वजह

नई दिल्ली: तंबाकू और सिगरेट की लत आज भी भारत में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती…

12 hours ago

AI और डिजिटल क्रांति का नया केंद्र बनेगा भारत! डेटा सेंटर में अरबों डॉलर का निवेश, लाखों नौकरियों के खुलेंगे रास्ते

नई दिल्ली: भारत तेजी से दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल और तकनीकी केंद्रों में अपनी…

12 hours ago

यूपी के 3 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को बड़ा झटका, जून से बिल पर लगेगा 10% अतिरिक्त चार्ज

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के तीन करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं के लिए जून महीने की…

12 hours ago

डिजिटल दुनिया में महिलाओं की दमदार एंट्री, इंटरनेट इस्तेमाल में दोगुना उछाल; आर्थिक ताकत भी बढ़ी

नई दिल्ली: देश में महिलाओं की डिजिटल पहुंच और आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर बड़ी तस्वीर…

12 hours ago

दिल्ली में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम, ISI से जुड़े 9 संदिग्ध गिरफ्तार; हथियार, ग्रेनेड और विस्फोटक बरामद

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में एक बड़े आतंकी हमले की साजिश को सुरक्षा…

12 hours ago