भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर एक बार फिर हलचल तेज़ हो गई है। आज रात अमेरिकी अधिकारियों की एक हाई-लेवल टीम भारत पहुंच रही है, जो अगले दो दिनों तक ट्रेड डील की शर्तों पर बातचीत करेगी। इस डेलिगेशन में US चीफ नेगोशिएटर ब्रेंडेन लिंच और डिप्टी USTR रिक स्विट्जर शामिल हैं। भारत की तरफ से इंडस्ट्री मंत्रालय के ज्वॉइंट सेक्रेटरी दर्पण जैन इस पूरी बातचीत के चीफ नेगोशिएटर होंगे। यह वही अमेरिकी टीम है जो 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद दूसरी बार भारत आ रही है। भारत ने भी अपनी “रेड लाइन” पर किसी समझौते के मूड में न होने का साफ संकेत दे दिया है।
पुतिन विज़िट के बाद US का अहम दौरा
दिलचस्प बात यह है कि ये दौरा ठीक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के तुरंत बाद हो रहा है। जाहिर है कि अब अमेरिका को भारत-रूस समीकरण और साफ दिखाई पड़ रहा होगा, और यही वजह है कि ये बातचीत और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत भी चाह रहा है कि ट्रंप प्रशासन के साथ किसी न किसी रूप में एक फाइनल डील हो जाए, जिससे रूस से तेल खरीद को लेकर लगाए गए भारी-भरकम 50% टैरिफ कम किए जा सकें।
इस बीच, दौरे से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय चावल पर तीखा बयान दे दिया। उन्होंने व्हाइट हाउस में मीटिंग के दौरान एग्रीकल्चर इंपोर्ट्स पर नए टैरिफ लगाने की बात कही और खासतौर पर भारत के चावल और कनाडा के फर्टिलाइज़र को टारगेट किया।
हालांकि एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि इस बयान को ज़्यादा गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। ये ट्रंप की वही पुरानी बॉरगेनिंग ट्रिक है—बातचीत शुरू होने से पहले दबाव बनाओ। चावल का मुद्दा उठाने के पीछे एक और वजह यह भी है कि भारत पहले ही साफ कर चुका है कि वह एग्रीकल्चर सेक्टर में अपनी सीमा से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने भी कहा कि ट्रंप का यह नया टैरिफ बयान असल में घरेलू राजनीति में किसानों को संदेश देने का तरीका है, न कि कोई बड़ा पॉलिसी बदलाव।