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UP Teachers Transfer: सरकारी शिक्षकों को बड़ी राहत, अब सरप्लस शिक्षकों के भी होंगे तबादले; 18 जून से शुरू होंगे आवेदन

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर है। राज्य सरकार ने लंबे समय से प्रतीक्षित स्थानांतरण प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि पहली बार छात्र संख्या और शिक्षक अनुपात के आधार पर सरप्लस घोषित शिक्षकों को भी सामान्य तबादला प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके लिए 18 जून से आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 30 जून तक स्थानांतरण आदेश जारी कर दिए जाएंगे।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। स्थानांतरण नीति के तहत प्रदेशभर के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के पुनर्संतुलन की तैयारी की गई है, ताकि जहां शिक्षकों की कमी है वहां पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जा सके।

12 जून को जारी होगी सरप्लस शिक्षकों की सूची

नई व्यवस्था के तहत जिला विद्यालय निरीक्षक 12 जून को एनआईसी पोर्टल पर सरप्लस शिक्षकों का पूरा विवरण अपलोड करेंगे। इसके बाद शिक्षक 18 जून से ई-मेल के माध्यम से स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकेंगे।

आवेदनों की जांच 25 जून तक पूरी की जाएगी और 30 जून को अंतिम स्थानांतरण आदेश जारी किए जाएंगे।

किसे माना जाएगा सरप्लस शिक्षक?

विभाग की ओर से तय मानकों के अनुसार यदि किसी विद्यालय में प्रति प्रवक्ता न्यूनतम पांच कक्षाएं पढ़ाने लायक छात्र उपलब्ध नहीं हैं, तो संबंधित शिक्षक को सरप्लस माना जाएगा। इसी तरह सहायक अध्यापक के लिए न्यूनतम छह कक्षाओं के मानक को आधार बनाया गया है।

प्रदेश के करीब 2400 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में लगभग 20 हजार शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि स्वीकृत पदों की संख्या करीब 35 हजार है। इसके बावजूद कई विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या आवश्यकता से अधिक है, जबकि कई स्कूल स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं।

सबसे जूनियर शिक्षक का पहले होगा तबादला

स्थानांतरण प्रक्रिया में सरप्लस शिक्षकों के चयन के लिए वरिष्ठता को आधार बनाया जाएगा। जिस शिक्षक ने किसी विद्यालय में सबसे बाद में कार्यभार ग्रहण किया होगा, उसका स्थानांतरण सबसे पहले किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य विद्यालयों में शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है, ताकि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

तीन जोन में बांटे गए राजकीय विद्यालय

स्थानांतरण नीति के तहत प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को तीन अलग-अलग जोन में विभाजित किया गया है।

नगर निगम सीमा और जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर की दूरी तक स्थित विद्यालयों को जोन-1 में रखा गया है। तहसील मुख्यालय से दो किलोमीटर की दूरी तक आने वाले विद्यालय जोन-2 में शामिल होंगे, जबकि बाकी सभी विद्यालयों को जोन-3 की श्रेणी में रखा गया है।

100 अंकों के आधार पर होगा मूल्यांकन

शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए 100 अंकों की मूल्यांकन प्रणाली लागू की गई है। इसमें दिव्यांग शिक्षकों को श्रेणी के अनुसार अधिकतम 20 अंक दिए जाएंगे। पति-पत्नी या बच्चों के दिव्यांग होने की स्थिति में 10 अंक निर्धारित किए गए हैं।

राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को 10 अंक, पत्नी की मृत्यु के बाद पुनर्विवाह न करने वाले पुरुष शिक्षकों को 10 अंक तथा विधवा या तलाकशुदा महिला शिक्षिकाओं को भी 10 अंक दिए जाएंगे।

इसके अलावा जोन-3 में सेवाकाल के प्रत्येक वर्ष पर दो अंक और अधिकतम 10 अंक, जबकि जोन-2 में प्रत्येक वर्ष पर एक अंक और अधिकतम 10 अंक दिए जाएंगे। शिक्षकों की आयु के आधार पर भी अधिकतम 10 अंक निर्धारित किए गए हैं।

शिक्षकों की कमी और असंतुलन दूर करने की तैयारी

माध्यमिक शिक्षा विभाग का मानना है कि नई स्थानांतरण नीति से प्रदेशभर के विद्यालयों में शिक्षकों का संतुलित वितरण सुनिश्चित होगा। इससे उन स्कूलों को राहत मिलेगी जहां शिक्षकों की भारी कमी है और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

सरकार का लक्ष्य शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी कर विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना है।

 

vineet verma

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