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ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट से रिपब्लिकन खेमे में बेचैनी! चुनाव से 4 दिन पहले रद्द कीं दो रैलियां, क्या हाथ से निकल रहा है सीनेट का कंट्रोल?

नई दिल्ली: अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के सामने मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। चुनाव में महज चार दिन बाकी हैं और सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलती नजर आ रही है। ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट, महंगाई और आम लोगों के बढ़ते खर्च जैसे मुद्दे रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। इस बीच ट्रंप ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में कैनसस और आयोवा की अपनी दो रैलियां रद्द कर दी हैं। अब वह व्यक्तिगत सभाओं के बजाय फोन के जरिए ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं तक पहुंचने की रणनीति अपना रहे हैं। वहीं, अलास्का में एक कानूनी विवाद ने सीनेट चुनाव के नतीजों को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ा दी है।

RealClearPolling के आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर डेमोक्रेटिक पार्टी को 51.4 प्रतिशत और रिपब्लिकन पार्टी को 43.2 प्रतिशत समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। दोनों दलों के बीच 8.2 प्रतिशत अंकों का अंतर है। अमेरिका में कानून और सार्वजनिक नीति के प्रोफेसर तथा मार्क्वेट लॉ स्कूल पोल के निदेशक चार्ल्स फ्रैंकलिन के मुताबिक, ट्रंप की गिरती लोकप्रियता और अर्थव्यवस्था को लेकर मतदाताओं की चिंताएं रिपब्लिकन पार्टी के लिए परेशानी बढ़ा रही हैं।

सर्वे में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 37 फीसदी, 61 प्रतिशत लोग नाखुश

विस्कॉन्सिन में 14 से 22 अक्टूबर के बीच किए गए मार्क्वेट लॉ स्कूल के सर्वे को 28 अक्टूबर को जारी किया गया। इसके मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग 37 प्रतिशत रही, जबकि 61 प्रतिशत लोगों ने उनके कामकाज को लेकर असहमति जताई।

सर्वे में अर्थव्यवस्था को लेकर भी लोगों की चिंता सामने आई। केवल 16 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति एक साल पहले के मुकाबले बेहतर हुई है। वहीं, 42 प्रतिशत लोगों ने अपनी आर्थिक हालत पहले से खराब बताई। इतने ही प्रतिशत यानी 42 फीसदी लोगों का कहना था कि उनकी आर्थिक स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है।

चार्ल्स फ्रैंकलिन ने अल जजीरा से बातचीत में कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों में मतदान को लेकर ज्यादा उत्साह दिखाई दे रहा है। उन्हें भरोसा है कि वे वोट डालने जरूर जाएंगे। दूसरी ओर, मौजूदा राष्ट्रीय हालात को लेकर रिपब्लिकन समर्थकों में निराशा नजर आ रही है।

अर्थव्यवस्था और महंगाई का असर आम मतदाताओं की रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई दे रहा है। एरिजोना में रहने वाले एक सेवानिवृत्त व्यक्ति ने अल जजीरा को बताया कि किराने के सामान की बढ़ती कीमतें उनके लिए बड़ी चिंता बन गई हैं। उन्होंने कहा कि हर बार किराने की दुकान पर जाने पर कीमतों को देखकर हैरानी होती है।

टेक्सास और मिशिगन में भी डेमोक्रेट्स को बढ़त, मुकाबला कितना करीबी?

गुरुवार को जारी सीएनएन के सर्वेक्षण में भी डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को कुछ अहम मुकाबलों में बढ़त दिखाई गई। टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टैलारिको को 49 प्रतिशत और रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन को 43 प्रतिशत समर्थन मिलता दिखाया गया है।

इसी तरह मिशिगन में डेमोक्रेट अब्दुल अल-सईद को 49 प्रतिशत और रिपब्लिकन माइक रोजर्स को 42 प्रतिशत समर्थन मिलने की बात सामने आई है।

हालांकि, चार्ल्स फ्रैंकलिन ने आगाह किया है कि चुनावी सर्वेक्षण हमेशा सटीक नतीजों की गारंटी नहीं देते। उनके मुताबिक, करीबी मुकाबलों में थोड़े से मतदाता बदलाव या सर्वेक्षण की संभावित त्रुटियों के कारण परिणाम किसी भी तरफ जा सकते हैं। ऐसे में सर्वेक्षणों में दिख रही बढ़त को चुनावी जीत मान लेना जल्दबाजी होगी।

अलास्का में कानूनी विवाद, चुनाव के बाद भी अटक सकता है नतीजा

अमेरिकी चुनाव के बीच अलास्का में एक अलग तरह का विवाद सामने आया है। यहां सीनेट सीट के चुनाव में एक ही नाम वाले दो उम्मीदवारों के कारण कानूनी पेच फंस गया है। इनमें एक मौजूदा रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन हैं, जबकि दूसरे निर्दलीय उम्मीदवार भी इसी नाम से चुनाव मैदान में हैं और रिपब्लिकन के तौर पर पंजीकृत भी हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेट्स पर मतदाताओं को भ्रमित करने और रिपब्लिकन सीनेटर का समर्थन कमजोर करने के लिए इसी नाम के निर्दलीय उम्मीदवार को मैदान में उतारने का आरोप लगाया है। ट्रंप ने इसे चुनावी धोखाधड़ी करार दिया है।

इस विवाद को लेकर अमेरिकी न्याय विभाग ने कानूनी कार्रवाई की है। वहीं, डेमोक्रेटिक उम्मीदवार मैरी पेल्टोला ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मुद्दा अलास्का के लोगों की वास्तविक चिंताओं, खासकर बढ़ते जीवन-यापन के खर्च से ध्यान हटाने की कोशिश है।

अल जजीरा के अमेरिकी संवाददाता एलन फिशर के मुताबिक, यदि सीनेट में बहुमत का फैसला इस सीट पर निर्भर करता है तो विवाद का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में 3 नवंबर को मतदान खत्म होने के बाद भी कई दिनों या हफ्तों तक यह स्पष्ट नहीं हो पाएगा कि सीनेट में किस दल का नियंत्रण रहेगा।

साउथ कैरोलिना में ट्रंप ने ग्राहम के लिए संभाला प्रचार

चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में डोनाल्ड ट्रंप रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्लिन ग्राहम के समर्थन में साउथ कैरोलिना पहुंचे। उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एनी एंड्रयूज से है और यह सीट भी करीबी मुकाबले वाली मानी जा रही है।

रॉक हिल में आयोजित रैली के दौरान ट्रंप ने अपने समर्थकों से मतदान के दिन बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि चुनाव को हल्के में नहीं लेना चाहिए। डार्लिन ग्राहम का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह आगे चल रही हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रचार जारी रखना जरूरी है। उन्होंने समर्थकों से चुनाव में अपनी सक्रिय भागीदारी दिखाने को कहा।

जेडी वेंस भी मैदान में, टेक्सास में पैक्सटन के लिए मांगे वोट

रिपब्लिकन पार्टी की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी प्रचार में जुटे हैं। उन्होंने टेक्सास में सीनेट उम्मीदवार केन पैक्सटन के साथ डलास के पास वेदरफोर्ड में रैली की। इस दौरान उन्होंने समर्थकों से रिपब्लिकन उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने की अपील की।

वेंस ने अपने संबोधन में टेक्सास की राजनीतिक पहचान का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य अपनी अलग पहचान बनाए रखेगा और कैलिफोर्निया जैसा नहीं बनेगा। उनका यह बयान डेमोक्रेटिक नीतियों पर निशाना साधने के तौर पर देखा गया।

ओबामा ने जॉन ओसॉफ के लिए संभाला मोर्चा, ट्रंप की नीतियों पर हमला

डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से भी प्रचार अभियान में बड़े चेहरे उतर चुके हैं। पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बुधवार को जॉर्जिया में डेमोक्रेटिक सीनेटर जॉन ओसॉफ के समर्थन में रैली की। अपने संबोधन में उन्होंने ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों और ईरान के साथ युद्ध से निपटने के तरीके की आलोचना की।

वहीं, ओसॉफ के रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक कॉलिन्स ने ओबामा के प्रचार अभियान में शामिल होने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ओसॉफ को अपने चुनावी प्रदर्शन को लेकर चिंता है, इसलिए उन्हें पूर्व राष्ट्रपति का सहारा लेना पड़ रहा है। कॉलिन्स के मुताबिक, यदि ओसॉफ मजबूत स्थिति में होते तो उन्हें किसी बड़े नेता को प्रचार के लिए बुलाने की जरूरत नहीं पड़ती।

कमला हैरिस ने भी टेक्सास और जॉर्जिया में डेमोक्रेट्स के लिए मांगे वोट

पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने भी चुनाव प्रचार के अंतिम दिनों में सक्रियता बढ़ा दी है। गुरुवार को वह अटलांटा के क्लार्क विश्वविद्यालय में जॉर्जिया के सीनेटर जॉन ओसॉफ के साथ शामिल हुईं। यहां उन्होंने युवाओं से मतदान करने की अपील की।

इसके अलावा हैरिस ने जॉर्जिया के मैकॉन में भी प्रचार किया। इस दौरान उन्होंने बढ़ती महंगाई और आम लोगों के जीवन-यापन के खर्च को लेकर ट्रंप प्रशासन की नीतियों की आलोचना की। दूसरी ओर, टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टैलारिको ने डलास में अपने अंतिम चुनाव प्रचार दौरे के तहत रैली की।

ट्रंप ने क्यों रद्द कीं कैनसस और आयोवा की दो रैलियां?

मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रचार कार्यक्रम में बदलाव किया है। उन्होंने शनिवार को कैनसस के सलीना और रविवार को आयोवा के डब्यूक में होने वाली दो रैलियां रद्द कर दी हैं। अब उनकी जगह करीब 20 राज्यों में टेलीफोन के जरिए प्रचार अभियान चलाने की योजना है।

रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के अध्यक्ष जो ग्रुटर्स ने इस बदलाव का बचाव किया है। उनका कहना है कि फोन के जरिए होने वाली रैलियों से ट्रंप उन मतदाताओं तक भी पहुंच सकेंगे, जहां व्यक्तिगत रूप से जाकर सभा करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि देशभर के मतदाता चुनाव से पहले राष्ट्रपति ट्रंप को सुनना चाहते हैं और आखिरी 72 घंटे का यह अभियान पार्टी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

गुरुवार को ट्रंप ने खुद भी कैनसस जाने की जरूरत पर सवाल उठाया। यहां रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल का मुकाबला डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एडम हैमिल्टन से है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कैनसस जाने की जरूरत है।

अब चुनाव प्रचार के आखिरी चार दिनों में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। एक तरफ ट्रंप अपनी पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ ओबामा और कमला हैरिस जैसे डेमोक्रेटिक नेता भी मैदान में उतर चुके हैं। ऐसे में 3 नवंबर के नतीजे न केवल अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का समीकरण तय करेंगे, बल्कि ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के अगले दो वर्षों की राजनीतिक दिशा पर भी असर डाल सकते हैं।

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