टीसीएस में कर्मचारियों की कटौती
देश में लाखों युवा पढ़-लिखकर एक बेहतर ज़िंदगी का सपना देखते हैं। अच्छी नौकरी, स्थिर आमदनी और सुरक्षित भविष्य-यही उम्मीद लेकर वे बड़ी कंपनियों के दरवाज़े तक पहुंचते हैं। लेकिन कई बार यही सपना अचानक टूट जाता है, जब कुछ ही वक्त बाद हाथ में थमा दिया जाता है नौकरी छोड़ने का नोटिस। ऐसा ही कुछ हाल के महीनों में देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में देखने को मिला है।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने बीते दो तिमाहियों में हजारों कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया। जुलाई-सितंबर और फिर अक्टूबर-दिसंबर की तिमाही में कंपनी के वर्कफोर्स में बड़ी कटौती हुई। 13 जनवरी को आए तिमाही नतीजों में TCS ने बताया कि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में नेट आधार पर 11,151 कर्मचारियों की संख्या घटी, जबकि इससे पिछली तिमाही में 19,755 कर्मचारियों की कमी आई थी।
कंपनी ने इसे “वर्कफोर्स रीस्ट्रक्चरिंग और रोल री-अलाइनमेंट” का हिस्सा बताया, लेकिन इसका असर सीधे उन कर्मचारियों पर पड़ा, जो नौकरी को अपना सुरक्षित भविष्य मान बैठे थे।
इसी दौर में आईटी सेक्टर की दूसरी दिग्गज कंपनी इन्फोसिस ने बिल्कुल अलग तस्वीर पेश की। 14 जनवरी को तीसरी तिमाही के नतीजे जारी करते हुए इन्फोसिस ने बताया कि दिसंबर तिमाही में उसके वर्कफोर्स में 5,043 से अधिक कर्मचारियों की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही कंपनी के कुल कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 3,37,034 हो गई।
खास बात यह रही कि अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच इन्फोसिस ने करीब 18,000 फ्रेशर्स को ऑनबोर्ड किया।
कंपनी के CEO सलिल पारेख ने अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस में कहा कि हेडकाउंट में यह बढ़ोतरी बाजार और डिमांड को लेकर कंपनी के भरोसे को दर्शाती है। इसके साथ ही इन्फोसिस का एट्रिशन रेट भी घटा है, जो पिछली तिमाही के 14.3 प्रतिशत से कम होकर 12.3 प्रतिशत पर आ गया।
इन्फोसिस ने यह भी साफ किया कि वह मौजूदा वित्त वर्ष में 20,000 एंट्री-लेवल कर्मचारियों को जोड़ने के अपने लक्ष्य पर कायम है। CFO जयेश संघराजका के मुताबिक, कंपनी अब तक लगभग 18,000 फ्रेशर्स को हायर कर चुकी है और पूरे FY26 में 20,000 फ्रेशर्स को ऑनबोर्ड करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
हालांकि, तिमाही नतीजों की बात करें तो लेबर कोड से जुड़े 1,289 करोड़ रुपये के खर्च की वजह से इन्फोसिस का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2.2 प्रतिशत घटकर 6,654 करोड़ रुपये रह गया। इसके बावजूद कंपनी ने अपने रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस को बढ़ाया है। तिमाही के दौरान कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 8.9 प्रतिशत बढ़कर 45,479 करोड़ रुपये पहुंच गया।
एक तरफ जहां TCS और HCLTech जैसी कंपनियों में हेडकाउंट घट रहा है, वहीं दूसरी तरफ इन्फोसिस फ्रेशर्स को मौके दे रही है। ऐसे में आईटी सेक्टर की ये दो तस्वीरें युवाओं के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं- क्या पढ़ाई और मेहनत आज भी नौकरी की गारंटी है, या फिर स्थिरता अब सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है?
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