बाजार

ट्रंप की ‘वार वार्निंग’ से दलाल स्ट्रीट पर ‘ब्लैक थर्सडे’: 1500 अंक टूटा सेंसेक्स, 11 लाख करोड़ स्वाहा

मुंबई/वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक आक्रामक बयान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था सहित भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) की नींव हिला दी है। ईरान पर “भीषण हमले” की चेतावनी के बाद गुरुवार को भारतीय बाजार खुलते ही ताश के पत्तों की तरह ढह गया। महज एक मिनट के भीतर निवेशकों की 11 लाख करोड़ रुपये की गाढ़ी कमाई डूब गई।

बाज़ार का ताज़ा हाल: मुख्य आंकड़े

  • सेंसेक्स (Sensex): शुरुआती कारोबार में करीब 1,385 अंक (1.89%) की भारी गिरावट के साथ 71,748 के स्तर पर।
  • निफ्टी (Nifty): 426 अंक लुढ़ककर 22,253 के नीचे पहुंचा।

मार्केट कैप में सेंध: बुधवार को बीएसई का मार्केट कैप 422.01 लाख करोड़ रुपये था, जो गुरुवार सुबह गिरकर 412 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।

ट्रंप की ‘जोरदार’ हमले की धमकी और तेल का खेल
राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में युद्ध खत्म करने का कोई स्पष्ट रोडमैप तो नहीं दिया, लेकिन यह जरूर कह दिया कि अगले 2-3 हफ्तों में अमेरिका ईरान पर “बहुत जोरदार” हमला करेगा। इस बयान ने आग में घी का काम किया:

क्रूड ऑयल में उबाल: ब्रेंट क्रूड 4% उछलकर $105 प्रति बैरल के पार निकल गया।

होर्मुज स्ट्रेट का सस्पेंस: इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के भविष्य पर स्पष्टता न होने से वैश्विक तेल आपूर्ति ठप होने का डर बढ़ गया है।

एशियाई बाजारों में भगदड़: जापान का निक्केई और कोरिया का कोस्पी भी 4% तक टूट गए।

क्यों मची भारतीय बाजार में त्राहि-त्राहि? (5 बड़े कारण)

  1. अनिश्चित भू-राजनीतिक तनाव
    ट्रंप के “रणनीतिक उद्देश्य पूरे होने के करीब हैं” वाले बयान ने निवेशकों को उलझन में डाल दिया है। युद्ध कब रुकेगा, इसकी कोई समयसीमा नहीं दी गई है।
  2. $105 पर पहुंचा कच्चा तेल
    भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतों में $100 के पार की तेजी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई और चालू खाता घाटे (CAD) का बड़ा खतरा है।
  3. FPIs की आक्रामक बिकवाली
    विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, केवल 1 अप्रैल को ही उन्होंने 8,331.15 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
  4. कमजोर रुपया और डॉलर की मजबूती
    युद्ध की स्थिति में निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए डॉलर की ओर भाग रहे हैं, जिससे रुपया कमजोर हो रहा है और घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ रहा है।
  5. वैश्विक पैनिक सेल
    ट्रंप की टिप्पणी के बाद अमेरिकी फ्यूचर्स और एशियाई बाजारों में मची बिकवाली का असर सीधा दलाल स्ट्रीट पर दिखा।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट (Middle East) से शांति के संकेत नहीं मिलते, तब तक उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। छोटे निवेशकों को फिलहाल जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय बाजार के स्थिर होने का इंतजार करने की सलाह दी गई है।

बड़ी बात: “अगले 21 दिन वैश्विक बाजारों के लिए बेहद संवेदनशील हैं। ट्रंप की सैन्य कार्रवाई का फैसला तय करेगा कि सेंसेक्स की रिकवरी होगी या यह और नीचे गिरेगा।” — मार्केट एक्सपर्ट

news desk

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