वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई व्यापारिक चेतावनी ने एक बार फिर वैश्विक बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में हलचल बढ़ा दी है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि जो देश अमेरिकी टेक कंपनियों से डिजिटल सर्विस टैक्स वसूलेंगे, उनके अमेरिका भेजे जाने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने ऐसे देशों के साथ मौजूदा व्यापार समझौतों को भी खत्म करने की चेतावनी दी है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब डिजिटल अर्थव्यवस्था और सीमा पार टेक कारोबार को लेकर कई देशों और अमेरिका के बीच पहले से मतभेद बने हुए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि कोई भी देश अगर अमेरिकी डिजिटल कंपनियों पर डिजिटल सर्विस टैक्स लागू करता है, तो उस देश से आने वाले सामान पर अमेरिका तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू कर सकता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह फैसला किसी मौजूदा व्यापार समझौते से ऊपर माना जाएगा, चाहे समझौता लागू हुआ हो या नहीं।
अमेरिकी प्रशासन लंबे समय से डिजिटल सर्विस टैक्स का विरोध करता रहा है। अमेरिका का मानना रहा है कि इस तरह के टैक्स का सबसे ज्यादा असर उन बड़ी टेक कंपनियों पर पड़ता है जो अमेरिका आधारित हैं और वैश्विक स्तर पर डिजिटल सेवाएं देती हैं।
अमेरिकी पक्ष का तर्क रहा है कि ऐसे टैक्स अंतरराष्ट्रीय व्यापार में असंतुलन पैदा कर सकते हैं और डिजिटल निर्यात को प्रभावित कर सकते हैं।
डिजिटल सर्विस टैक्स एक ऐसा कर ढांचा है जिसके तहत देश अपने यहां कारोबार करने वाली विदेशी डिजिटल कंपनियों की कमाई पर टैक्स लगाते हैं।
यह टैक्स खासतौर पर उन बहुराष्ट्रीय टेक कंपनियों पर लागू होता है जो किसी देश में ऑनलाइन सेवाओं से राजस्व कमाती हैं, भले ही वहां उनकी प्रत्यक्ष मौजूदगी सीमित हो।
भारत के लिए इस चेतावनी का तत्काल प्रभाव सीमित माना जा रहा है क्योंकि भारत पहले ही अपने इक्वलाइजेशन लेवी ढांचे के दोनों प्रमुख हिस्सों को समाप्त कर चुका है।
यह व्यवस्था विदेशी डिजिटल कंपनियों से कर वसूली के लिए लागू की गई थी। वर्ष 2016 में ऑनलाइन विज्ञापन सेवाओं पर इसे लागू किया गया था और बाद में इसमें बदलाव किए गए।
इसके बाद सरकार ने चरणबद्ध तरीके से इन प्रावधानों को समाप्त कर दिया। माना गया था कि इससे व्यापारिक तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
ट्रंप की इस घोषणा के बाद यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि कई यूरोपीय देश डिजिटल सेवाओं पर अलग कर व्यवस्था लागू कर चुके हैं।
डिजिटल कर को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं। अमेरिका का मानना है कि इस तरह के कदम उसकी टेक कंपनियों के लिए व्यापारिक बाधाएं पैदा करते हैं।
इससे पहले भी ट्रंप फ्रांस को चेतावनी दे चुके हैं कि अगर अमेरिकी टेक कंपनियों पर वहां लागू डिजिटल टैक्स वापस नहीं लिया गया तो जवाबी टैरिफ लगाया जा सकता है।
फ्रांस ने वर्ष 2019 में देश के भीतर कमाई करने वाली बड़ी टेक कंपनियों के राजस्व पर 3 प्रतिशत कर लागू किया था।
इंडोनेशिया के पूर्वी हिस्से में शनिवार सुबह आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी…
रांची।झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार…
Vande Mataram Row: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस मुख्यालय में हुए कार्यक्रम के दौरान…
नई दिल्ली। देश में रसोई गैस यानी LPG की सप्लाई को अंतरराष्ट्रीय संकट से बचाने…
BWF World Championships 2026: बैडमिंटन की दुनिया का सबसे बड़ा टूर्नामेंट एक बार फिर भारत…
तेल अवीव। इजरायल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू…