नई दिल्ली। रूस से डीजल आपूर्ति को लेकर अमेरिका के फैसले ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यूक्रेन को ऐसा राष्ट्रपति चुनना चाहिए, जो रूस के साथ युद्ध खत्म करने के लिए समझौता कर सके। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने रूसी डीजल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है।
जेलेंस्की इस कदम के विरोध में हैं। उनका तर्क है कि रूस को आर्थिक राहत देने से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को युद्ध जारी रखने के लिए संसाधन मिल सकते हैं। दूसरी तरफ, ट्रंप का दावा है कि रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों से ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और कीमतें बढ़ रही हैं। इस विवाद के बीच ऊर्जा बाजार, युद्ध समाप्त करने की कोशिशें और अमेरिका के आगामी मध्यावधि चुनाव भी अहम मुद्दे बन गए हैं।
10 अक्टूबर को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन को नया नेता चुनने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जेलेंस्की के पास रूस के साथ समझौता करने के कई अवसर थे, लेकिन उन्होंने उनका इस्तेमाल नहीं किया।
ट्रंप की नाराजगी की एक बड़ी वजह यूक्रेन की ओर से रूसी तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाना भी है। अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, इन हमलों से रूस के डीजल उत्पादन पर असर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने जेलेंस्की से रूसी रिफाइनरियों पर हमले रोकने को कहा था, लेकिन यूक्रेन ने इन्हें जारी रखा।
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया कि अमेरिका ने यूक्रेन से छह बार ऐसे हमले रोकने के लिए कहा था। हालांकि, इस पूरे विवाद में यूक्रेन का तर्क है कि रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठान उसकी सैन्य गतिविधियों को बनाए रखने में मदद करते हैं और उन्हें निशाना बनाना रूस की युद्ध क्षमता कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।
9 अक्टूबर को डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच करीब 90 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई। इसके बाद अमेरिका ने रूसी डीजल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने का फैसला किया। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस की युद्ध से होने वाली कमाई को सीमित करना था।
ट्रंप प्रशासन की दलील है कि रूसी डीजल की वैश्विक बाजार में आपूर्ति बढ़ने से ईंधन की कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। इसी बीच रूस ने भी 10 अक्टूबर को डीजल निर्यात पर अपनी कुछ पाबंदियां तत्काल प्रभाव से हटा दीं।
लेकिन जेलेंस्की ने अमेरिकी फैसले पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि रूस को आर्थिक राहत देना युद्ध जारी रखने की उसकी क्षमता को मजबूत कर सकता है। यूक्रेन ने यह भी आरोप लगाया कि इस फैसले में उसे भरोसे में नहीं लिया गया।
इस तरह विवाद केवल प्रतिबंधों में ढील तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह सवाल भी है कि युद्ध खत्म करने के लिए आर्थिक दबाव बनाए रखना ज्यादा प्रभावी होगा या ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाकर वैश्विक कीमतों को नियंत्रित करना।
अमेरिका के फैसले के बीच 10 अक्टूबर को रूस ने यूक्रेन के दक्षिणी शहर जापोरिज्जिया पर हमला किया। यूक्रेनी पक्ष के मुताबिक, इस हमले में 20 लोगों की मौत हुई, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल थे। हमले में एक रिहायशी इमारत का हिस्सा भी मलबे में तब्दील हो गया।
जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस ने प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद भी नागरिक ठिकानों पर हमले जारी रखे। उन्होंने रूसी कार्रवाई को युद्ध रोकने की कोशिशों के विपरीत बताया।
इससे पहले भी यूक्रेन के अलग-अलग इलाकों में रूसी हमलों में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत होने की खबरें सामने आई थीं। ऐसे में ऊर्जा प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका और यूक्रेन के बीच बढ़ता मतभेद शांति प्रयासों के लिए नई चुनौती बन सकता है।
यूक्रेन का मानना है कि रूस की तेल रिफाइनरियां उसकी अर्थव्यवस्था और सैन्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन प्रतिष्ठानों पर हमले करके रूस की ईंधन आपूर्ति और युद्ध चलाने की क्षमता को प्रभावित किया जा सकता है।
जेलेंस्की ने पहले भी कहा है कि रूस यूक्रेनी शहरों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले जारी रखता है, इसलिए यूक्रेन भी रूसी ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की रणनीति जारी रखेगा।
यूक्रेन की ओर से दोनों देशों के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने का प्रस्ताव भी रखा गया है। हालांकि, ट्रंप की प्राथमिकता फिलहाल रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमले रोकने और ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने पर दिखाई दे रही है।
यही अंतर दोनों देशों की रणनीति में टकराव पैदा कर रहा है। यूक्रेन ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को रूस पर दबाव बनाने का जरिया मानता है, जबकि ट्रंप इन्हें वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए नुकसानदेह बता रहे हैं।
रूस से डीजल आपूर्ति पर अमेरिकी रुख को समझने के लिए अमेरिका की घरेलू आर्थिक स्थिति भी महत्वपूर्ण है। ईरान के साथ अमेरिकी संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ने की बात कही जा रही है। अमेरिकी डीजल की कीमतों में तेजी का असर परिवहन, कृषि और माल ढुलाई जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
डीजल महंगा होने से ट्रकों के जरिए सामान पहुंचाने की लागत बढ़ती है। इसका असर कारोबार और आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। ऐसे में ईंधन की कीमतें अमेरिकी सरकार के लिए आर्थिक के साथ-साथ राजनीतिक चुनौती भी बन जाती हैं।
नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप प्रशासन के लिए महंगाई और ईंधन की कीमतें अहम मुद्दे हैं। यदि ऊर्जा लागत बढ़ती है, तो इसका असर रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
हालांकि, रूस से डीजल आपूर्ति पर प्रतिबंधों में ढील देने से अमेरिकी बाजार में कीमतें कितनी घटेंगी, यह वैश्विक आपूर्ति, मांग और अन्य भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।
ट्रंप की मांग राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के पास यूक्रेन के राष्ट्रपति को सीधे पद से हटाने का अधिकार नहीं है। यूक्रेन में राष्ट्रपति का चुनाव देश के नागरिक करते हैं और राष्ट्रपति का सामान्य कार्यकाल पांच साल का होता है।
वोलोदिमीर जेलेंस्की 2019 में राष्ट्रपति चुने गए थे। उनका अगला नियमित चुनाव 2024 में होना था, लेकिन युद्धकालीन मार्शल लॉ के कारण चुनाव नहीं कराया गया। यूक्रेन के कानून के तहत मार्शल लॉ के दौरान राष्ट्रपति चुनाव कराने पर रोक है।
यूक्रेन के संविधान के अनुच्छेद 108 के अनुसार, नया निर्वाचित राष्ट्रपति पद संभालने तक मौजूदा राष्ट्रपति अपने दायित्व निभाता रहता है। राष्ट्रपति का कार्यकाल समाप्त होने या चुनाव में देरी होने की स्थिति को समझने के लिए संवैधानिक और युद्धकालीन कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखना जरूरी है।
इसलिए ट्रंप का बयान जेलेंस्की पर कूटनीतिक और राजनीतिक दबाव बढ़ा सकता है, लेकिन केवल अमेरिकी राष्ट्रपति की मांग से यूक्रेन का नेतृत्व नहीं बदलेगा।
रूस से डीजल आपूर्ति पर अमेरिकी फैसले ने युद्ध समाप्त करने के प्रयासों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। 9 अक्टूबर को मियामी में अमेरिका, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। इसका उद्देश्य युद्ध खत्म करने के लिए साझा प्रस्ताव तैयार करना था।
लेकिन रूस के साथ डीजल समझौते और जेलेंस्की के नेतृत्व पर ट्रंप के बयान ने वार्ता के माहौल को जटिल बना दिया है। यूक्रेन चाहता है कि रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखा जाए, जबकि ट्रंप ऊर्जा बाजार को राहत देने और युद्ध समाप्त करने के लिए समझौते की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन की ओर से मॉस्को पर ड्रोन हमलों का हवाला देते हुए तत्काल शांति वार्ता दोबारा शुरू होने की संभावनाओं पर सवाल उठाए हैं। रूसी सरकारी समाचार एजेंसी TASS के मुताबिक, अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर अगले दो सप्ताह में मॉस्को जा सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रूस के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाएगा या यूक्रेन की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखते हुए प्रतिबंधों और युद्धविराम पर अपना रुख बदलेगा। इसका असर न केवल रूस-यूक्रेन युद्ध, बल्कि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के रिश्तों पर भी पड़ सकता है।
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