जेनेवा (स्विट्जरलैंड)। अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व (Middle East) में शांति बहाली के लिए स्विट्जरलैंड में शुरू हुई हाई-प्रोफाइल वार्ता के पहले ही दौर में बड़ा कूटनीतिक विस्फोट हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बेहद आक्रामक धमकी के बाद नाराज ईरानी डेलिगेशन बैठक छोड़कर बाहर चला गया, जिसके कारण शांति वार्ता को बीच में ही रोकना पड़ा।
हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, बल्कि यह सिर्फ एक अस्थायी गतिरोध (Pause) है। इस तनाव के चलते दोनों देशों के नेताओं के बीच होने वाला ‘जॉइंट फोटो सेशन’ और ‘हैंडशेक’ कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया।
बैठक के दौरान माहौल तब बेहद तनावपूर्ण हो गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक कड़ा संदेश सामने आया। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा:
“ईरान लेबनान में अपने समर्थक (प्रॉक्सि) समूहों की गतिविधियां तुरंत रोके, नहीं तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अगर तुमने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने की कोशिश की, तो तुम्हारा देश नहीं बचेगा। यहां तक कि बैठक में आए ईरानी अधिकारी अपने देश वापस भी नहीं पहुंच पाएंगे।”
इस सीधी सैन्य धमकी से नाराज होकर ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची बैठक से बाहर निकल गए। बाद में गालिबाफ ने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए, ईरान की सेना किसी भी स्थिति का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद यह पहली आमने-सामने की मुलाकात थी। इसमें अमेरिका का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) कर रहे थे।
करीब 80 मिनट तक चली इस पहली बैठक में मुख्य रूप से इन 3 मुद्दों पर बात हो रही थी:
हालांकि, गतिरोध के बावजूद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उम्मीद नहीं छोड़ी है। वेंस ने कहा, “इस तरह की बेहद कठिन और संवेदनशील बातचीत में मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।”
ईरान ने वार्ता की मेज पर बैठते ही अमेरिका की नीयत पर सवाल उठा दिए। ईरान का कहना है कि अंतरिम समझौते की पहली और सबसे मुख्य शर्त थी— सभी मोर्चों पर युद्धविराम लागू कराना।
ईरान का आरोप है कि वाशिंगटन अब तक लेबनान में इजराइली हमलों को रुकवाने में पूरी तरह नाकाम रहा है। दूसरी ओर, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के रुख ने आग में घी का काम किया है, जिन्होंने साफ कह दिया है कि इजराइल दक्षिणी लेबनान में बनाई गई अपनी ‘सुरक्षा पट्टी’ (Security Belt) को किसी भी कीमत पर हटाने वाला नहीं है।
इस महा-वार्ता के पीछे पाकिस्तान और कतर बैकचैनल डिप्लोमेसी का काम कर रहे हैं। बैठक शुरू होने से ठीक पहले ईरानी वार्ताकार गालिबाफ ने पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों से अलग से मुलाकात की थी। पाकिस्तान इस पूरे शांति समझौते में मुख्य मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है।
भारतीय सिनेमा अब एक ऐसा मुकाम हासिल करने जा रहा है, जिसकी कल्पना शायद ही…
नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र का तीसरा सप्ताह सरकार और विपक्ष के बीच भारी…
नासिक। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के…
तृषा संग नाम जुड़ने की अटकलों के बीच बड़ा मोड़, चेंगलपट्टू कोर्ट में मामला बंद;…
आसमान से हाई-स्पीड इंटरनेट देने की रेस अब अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुकी…
केंद्र सरकार की ओर से परिसीमन विधेयक को दोबारा लाने के संकेत मिलते ही देश…