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ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात से बदले वैश्विक समीकरण: अमेरिका-चीन की बढ़ती नजदीकी भारत के लिए नई कूटनीतिक चुनौती

बीते कुछ महीनों से भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में खटास बढ़ती जा रही है. इसी बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा बदलाव तब देखने को मिला जब अमेरिका ने चीन पर लगाए गए 10% टैरिफ हटाए और इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिकी सामानों पर लगे 24% टैरिफ को समाप्त कर दिया. अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती यह करीबी भारत के लिए चिंताजनक संकेत माना जा रहा है.

ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात से बदला माहौल

हाल ही में हुई आसियान मीटिंग के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने वैश्विक राजनीति में नया मोड़ ला दिया. कहा जा रहा था कि ट्रंप इस मुलाकात को लेकर बेहद उत्साहित थे और उन्होंने चीन के साथ संबंधों को “नए सिरे से शुरू” करने की बात भी कही थी. वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन में शामिल नहीं हुए थे और वर्चुअल माध्यम से बैठक को संबोधित किया था.

भारत का झुकाव रूस-चीन की ओर?

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के साथ बढ़ते मतभेदों के बीच भारत धीरे-धीरे रूस और चीन के साथ रणनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर रहा है. हाल ही में एससीओ सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात ने इस धारणा को और मजबूत किया. यह मुलाकात इसका संकेत दे रही थीं कि भारत अब अपनी विदेश नीति में अमेरिका से दूरी बनाते हुए एशियाई शक्तियों के बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है. हालांकि अब अमेरिका और चीन के बढ़ती नजदीकियां भू-रणनीतिक समीकरणों के बदलने का संकेत दे रही हैं.

भारत के लिए कूटनीतिक चुनौती

अब जबकि अमेरिका और चीन के बीच तनाव घट रहा है, भारत के लिए यह स्थिति कुछ हद तक असहज हो सकती है. एक ओर भारत अमेरिका का रणनीतिक साझेदार है, वहीं दूसरी ओर वह चीन और रूस जैसे शक्तिशाली पड़ोसियों के साथ भी संतुलन बनाए रखना चाहता है.विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका-चीन संबंधों में स्थिरता आती है, तो भारत को अपनी विदेश नीति में नई रणनीतिक दिशा तलाशनी पड़ सकती है.

वैश्विक समीकरणों में बदलाव की आहट

ट्रंप-जिनपिंग की नई समझ और टैरिफ कम करने के फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार में सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, लेकिन इसके दीर्घकालिक असर को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं. क्या अमेरिका अब एशिया में अपनी प्राथमिकताएं बदल रहा है? चीन और अमेरिका के बीच ये सकारात्मक संबंध कब तक स्थाई रह सकेंगे और क्या भारत को नई कूटनीतिक रणनीति अपनानी होगी? यह आने वाले महीनों में तय होगा.

news desk

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