देश में महंगाई का असर अब सिर्फ रसोई के बजट तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि आम आदमी के सपनों पर भी भारी पड़ता नजर आ रहा है। कभी दाल-सब्जियों के बढ़ते दाम परेशान करते हैं तो कभी तेल, चीनी और प्याज की कीमतें घर का बजट बिगाड़ देती हैं। आलिशान घर और नई गाड़ी का सपना देखने वाला मध्यमवर्ग अब कई बार जरूरत की चीजें खरीदने से पहले भी कई बार सोचने को मजबूर है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए महंगाई के आंकड़ों को सामने रखा है।
देश में बढ़ती महंगाई को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 12 साल से भाजपा सरकार है और ‘अच्छे दिनों’ का आलम ये है कि कभी दाल, कभी सब्जी, कभी तेल और कभी चीनी आम आदमी का बजट बिगाड़ देती है।
खरगे ने कहा कि देश में महंगाई की मार है, लेकिन बीजेपी ध्यान भटकाने वाले स्टंट्स और बेतुकी बातों में उलझाकर अपनी करतूतों से पीछा छुड़ाना चाहती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महंगाई पर सवाल पूछती रहेगी।
खरगे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में प्याज, चीनी, तेल समेत कई जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों का जिक्र किया है।
खरगे ने अपने पोस्ट के जरिए महंगाई के बढ़ते बोझ को आंकड़ों के साथ समझाने की कोशिश की। उन्होंने मई 2013 में जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों की तुलना 2026 में बताए गए दामों से करते हुए दावा किया कि इस दौरान रोजमर्रा की कई चीजें काफी महंगी हुई हैं। खरगे के मुताबिक, टमाटर से लेकर आटा, प्याज और सरसों के तेल तक की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ है।
टमाटर: मई 2013 में 17.50 रुपये से बढ़कर 2026 में 120 रुपये, यानी 585% की बढ़ोतरी।
आटा: 21 रुपये से बढ़कर 69 रुपये, यानी 228% की बढ़ोतरी।
प्याज: 23 रुपये से बढ़कर 73 रुपये, यानी 217% की बढ़ोतरी।
सरसों का तेल: 102 रुपये से बढ़कर 263 रुपये, यानी 157% की बढ़ोतरी।
दालें (तुअर/उड़द/चना): खरगे के आंकड़ों के अनुसार, इनकी कीमतें औसतन 140 से 153 रुपये तक पहुंच गई हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के महंगाई और खाद्य पदार्थों के दामों को लेकर किए गए सोशल मीडिया पोस्ट पर मोदी सरकार और बीजेपी ने पलटवार किया है। सरकार और भाजपा का कहना है कि विपक्ष सिर्फ भ्रामक राजनीति कर रहा है और अपनी नाकामियों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है।
बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस पार्टी और खरगे जी केवल राजनीतिक फायदे के लिए महंगाई के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं और जनता के बीच गलतफहमी फैला रहे हैं।
सरकार ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल, उर्वरक और खाद्य आपूर्ति की स्थिति का कीमतों पर असर पड़ता है। हालांकि, सरकार का दावा है कि भारत में महंगाई अन्य देशों के मुकाबले काफी हद तक नियंत्रण में है।
वहीं, सरकार ने मुफ्त राशन योजना और अन्य कल्याणकारी कदमों का भी हवाला दिया है। सरकार के मुताबिक, इन योजनाओं के जरिए गरीबों को लगातार राहत दी जा रही है, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ कम हुआ है।
महंगाई को लेकर सरकार और विपक्ष के दावे भले ही अलग-अलग हों, लेकिन रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें आम आदमी के घरेलू बजट पर सीधा असर डालती हैं। ऐसे में आने वाले समय में महंगाई का मुद्दा राजनीतिक बहस के साथ-साथ आम जनता के लिए भी बड़ा सवाल बना रह सकता है।
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