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चॉपस्टिक की कहानी है बेहद दिलचस्प! खाने की मेज पर पहुंचने से पहले गर्म बर्तनों में काम आती थीं ये दो लकड़ी की डंडियां

नई दिल्ली: आज चॉपस्टिक एशियाई खानपान की पहचान बन चुकी है। चीन, जापान, कोरिया और कई अन्य देशों में लोग इससे नूडल्स, सुशी, मोमोज, डंपलिंग्स, चावल और छोटे-छोटे मांस या सब्जियों के टुकड़े आसानी से खाते हैं। लेकिन चॉपस्टिक का शुरुआती इस्तेमाल खाने के लिए नहीं, बल्कि रसोई में गर्म भोजन को संभालने और पकाते समय चीजों को पकड़ने के लिए किया जाता था। समय के साथ इसका इस्तेमाल रसोई से निकलकर खाने की मेज तक पहुंच गया और आज यह भोजन करने का एक लोकप्रिय तरीका बन चुका है।

चॉपस्टिक का इस्तेमाल सबसे पहले किस काम के लिए हुआ?

एशियाई खानपान में चॉपस्टिक का खास महत्व है। चीन, जापान, कोरिया, सिंगापुर, मलेशिया और वियतनाम जैसे देशों में आज इसका इस्तेमाल भोजन करने के लिए बड़े पैमाने पर होता है। हालांकि शुरुआती दौर में इसका मकसद खाना खाना नहीं था।

चॉपस्टिक का इतिहास प्राचीन चीन से जुड़ा माना जाता है। पुरातात्विक स्रोतों के अनुसार, चीन में करीब 1200 ईसा पूर्व के आसपास चॉपस्टिक के इस्तेमाल के प्रमाण मिलते हैं। शुरुआती चॉपस्टिक कांसे से बनाई जाती थीं और गर्म बर्तनों से भोजन निकालने या खाना पकाते समय सामग्री को पकड़ने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता था।

प्राचीन चीन में मिला चॉपस्टिक का पुराना प्रमाण

माना जाता है कि चॉपस्टिक का इस्तेमाल शांग राजवंश के समय से हो रहा था। हालांकि इस दावे से जुड़ा कोई प्रत्यक्ष पुरातात्विक प्रमाण नहीं मिला है। अब तक मिली सबसे पुरानी चॉपस्टिक में कांसे से बनी छह चॉपस्टिक शामिल हैं। इन्हें चीन के हेनान प्रांत में आनयांग के पास स्थित यिन के खंडहरों में खोजा गया था।

इन पुरानी चॉपस्टिक को देखकर माना जाता है कि उस समय इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से खाना पकाने के दौरान किया जाता था। गर्म बर्तनों में हाथ डालने के बजाय इनकी मदद से भोजन को पकड़ना और निकालना आसान होता था।

रसोई से निकलकर डाइनिंग टेबल तक कैसे पहुंची?

समय के साथ चॉपस्टिक का इस्तेमाल केवल रसोई तक सीमित नहीं रहा। अलग-अलग देशों ने अपनी जरूरत, खानपान और परंपराओं के अनुसार इनके आकार और डिजाइन में बदलाव किए। यही वजह है कि चीन और जापान की चॉपस्टिक में आपको अंतर देखने को मिलता है।

धीरे-धीरे इनका इस्तेमाल भोजन परोसने के साथ-साथ खाना खाने के लिए भी होने लगा। दो साधारण डंडियों से भोजन के छोटे टुकड़ों को उठाना आसान था, इसलिए यह तरीका लोकप्रिय होता गया।

आज एशियाई संस्कृति की पहचान बन चुकी है चॉपस्टिक

आज चॉपस्टिक सिर्फ खाना खाने का साधन नहीं रह गई हैं, बल्कि एशियाई संस्कृति और खानपान की पहचान का हिस्सा बन चुकी हैं। रसोई में गर्म भोजन को संभालने से शुरू हुई इनकी यात्रा अब डाइनिंग टेबल तक पहुंच चुकी है। यही वजह है कि चीन, जापान, कोरिया समेत कई एशियाई देशों के पारंपरिक भोजन के साथ चॉपस्टिक का इस्तेमाल आम तौर पर देखने को मिलता है।

vineet verma

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