गौतम गंभीर ये नाम आजकल काफी सुर्खियों में है. भारतीय क्रिकेट में इस नाम की चर्चा खूब हो रही है. दरअसल, गौतम गंभीर टीम इंडिया के चीफ कोच हैं और उनकी कोचिंग पर टीम इंडिया के प्रदर्शन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया का फ्लॉप शो जारी है. ऐसा नहीं है कि भारतीय टीम पहली बार हारी है, लेकिन ये हार इसलिए दर्द दे रही है क्योंकि टीम इंडिया अपने ही घर पर बुरी तरह से पिट रही है.
कीवियों ने भी आसानी से टीम इंडिया को हराया, और उसके बाद श्रीलंका जैसी कमजोर टीम ने भी चुनौती दी.
अब दक्षिण अफ्रीका ने 25 साल बाद टीम इंडिया को गहरा झटका दिया है. हार के बाद गंभीर पर चारों तरफ से सवाल उठने लगे. उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि लोग भूल जाते हैं कि मैंने इंग्लैंड में युवा टीम के साथ अच्छे नतीजे दिलाए थे. न्यूजीलैंड की बात कर लेते हैं, लेकिन यह भी मत भूलिए कि मेरे ही कोचिंग में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी और एशिया कप जीता था
हालांकि, गंभीर जब चैंपियंस ट्रॉफी जीतने की उपलब्धि बताते हैं, तो यह भी ध्यान देने वाली बात है कि चैम्पियनशिप के बाद भारत के पहले वनडे में रोहित शर्मा को कप्तानी से हटाया गया, जबकि फाइनल में उन्होंने प्लेयर ऑफ़ द मैच का खिताब जीता था. अगले ही मैच में उनकी प्लेइंग इलेवन में जगह पर सवाल उठे. ऑस्ट्रेलिया दौरा उनके करियर का आखिरी माना जा रहा था, लेकिन रोहित ने एक शतक और एक फिफ्टी लगाकर अपनी क्षमता साबित की.
कुछ आलोचक पूछते हैं कि गंभीर को क्यों नहीं हटाया जा सकता। गंभीर वही काम कर रहे हैं, जो कुछ साल पहले ग्रेग चैपल करते थे. टीम में फूट डालकर टीम को नीचे पहुंचाने के आरोप भी लगते रहे हैं. उदाहरण के तौर पर, रिपोर्ट्स के अनुसार, गौतम गंभीर चाहते थे कि श्रेयस अय्यर को टीम में शामिल न किया जाए. लेकिन रोहित शर्मा की मेहनत और जिद्द के कारण अय्यर को टीम में जगह मिली, और उन्होंने टूर्नामेंट में भारतीय टीम के लिए सबसे ज्यादा रन बनाए.
गंभीर पुरानी उपलब्धियों पर जोर दे रहे हैं, लेकिन यह भूल जाते हैं कि टीम अपने घर पर हार चुकी है और वह भी बुरी तरह. हार से ज्यादा उनके अडियल रवैये और बेतुके प्रयोग की वजह से टीम इंडिया को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है.
गंभीर जब कोच नहीं थे, तब भी उन्होंने कई पूर्व क्रिकेटरों पर अपना गुस्सा बाहर निकालने की खबरें सामने आईं. क्रिकेट जगत में गौतम गंभीर और एम.एस. धोनी के बीच पुराने तनाव की चर्चाएँ समय-समय पर होती रही हैं. 2011 विश्व कप फाइनल में गंभीर ने जीत का श्रेय पूरी टीम को देने की बात कही, जिससे धोनी के निर्णायक प्रदर्शन को कुछ लोगों ने नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. उस मैच में गंभीर ने अच्छी पारी खेली, लेकिन चर्चा अधिकतर धोनी की पारी पर रही.
इसके अलावा आईपीएल में विराट कोहली के साथ भी कई मौकों पर भिड़ंत हुई. गंभीर के कोच बनने के बाद सीनियर खिलाड़ी उनके रडार पर आ गए, और इस वजह से विराट और रोहित जैसे सीनियर खिलाड़ियों को कदम पीछे हटाने पड़े. टेस्ट में दोनों ही खिलाड़ियों ने समय से पहले संन्यास ले लिया, जबकि अभी वे खेल सकते थे.
बीसीसीआई ने अभी तक इस मामले में कोई फैसला नहीं लिया है, और लगता है कि गंभीर फिलहाल कोच पद पर बने रहेंगे. कुल मिलाकर, गंभीर को लेकर भले ही बीसीसीआई अभी कोई निर्णायक कदम नहीं उठा रहा हो, लेकिन भारतीय क्रिकेट इस समय गंभीर हालात से गुजर रही है.
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