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यूपी में बढ़ी महिलाओं की ताकत! हर पांचवीं महिला बनी संपत्ति की मालकिन, लेकिन इन बड़े फैसलों में घटी भागीदारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर बड़ी तस्वीर सामने आई है। राज्य में अब हर पांचवीं महिला के नाम जमीन या मकान का मालिकाना हक है। पिछले दो वर्षों में महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व में करीब 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, परिवार से जुड़े तीन अहम फैसलों में महिलाओं की भागीदारी में गिरावट भी देखने को मिली है।

संपत्ति की मालिक बनने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के छठे संस्करण की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2019-21 के दौरान 12.2 प्रतिशत महिलाओं के पास जमीन या मकान का एकल अथवा संयुक्त स्वामित्व था। यह आंकड़ा 2023-24 में बढ़कर 20.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि अब राज्य की हर पांचवीं महिला किसी न किसी संपत्ति की मालिक है।

देश के औसत से आगे निकला उत्तर प्रदेश

देशभर में महिलाओं के नाम पर जमीन या मकान के मालिकाना हक का प्रतिशत 14 से बढ़कर 18.8 प्रतिशत हो गया है। वहीं उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 20.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इससे साफ है कि महिलाओं को संपत्ति का अधिकार देने के मामले में प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है।

यूपी में शहरी महिलाएं आगे, देश में ग्रामीण महिलाओं का दबदबा

राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों की 19.1 प्रतिशत महिलाओं के पास संपत्ति का मालिकाना हक है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 18.2 प्रतिशत है। वहीं उत्तर प्रदेश में तस्वीर उलट है। यहां 20.8 प्रतिशत शहरी महिलाओं और 19.8 प्रतिशत ग्रामीण महिलाओं के पास जमीन या मकान का स्वामित्व है।

इन वजहों से बढ़ा महिलाओं का संपत्ति स्वामित्व

महिलाओं के नाम पर संपत्ति खरीदने को बढ़ावा देने के लिए सरकार की कई योजनाओं का असर दिखाई दे रहा है। राज्य में एक करोड़ रुपये तक की संपत्ति की रजिस्ट्री पर महिलाओं को एक प्रतिशत स्टांप ड्यूटी की छूट मिलती है। इसके अलावा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित मकानों की रजिस्ट्री भी महिलाओं के नाम पर की जा रही है। बढ़ती महिला रोजगार भागीदारी को भी इस बदलाव का प्रमुख कारण माना जा रहा है।

तीन अहम फैसलों में महिलाओं की भूमिका घटी

जहां एक ओर संपत्ति स्वामित्व बढ़ा है, वहीं परिवार से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसलों में महिलाओं की भागीदारी में कमी दर्ज की गई है। सर्वेक्षण के अनुसार, अपने स्वास्थ्य, घर के बड़े खर्च और रिश्तेदारों के यहां आने-जाने से जुड़े निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी 87.6 प्रतिशत से घटकर 85.9 प्रतिशत रह गई है।

शहरी महिलाओं की भागीदारी ज्यादा

इन फैसलों में उत्तर प्रदेश की 90.1 प्रतिशत शहरी महिलाएं सक्रिय भूमिका निभाती हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा 84.7 प्रतिशत है। आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक रूप से मजबूत होने के बावजूद घरेलू निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी को लेकर अभी भी सुधार की जरूरत बनी हुई है।

vineet verma

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