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‘सुपरमून’ बने चंदा मामा बच्चों की सेहत पर डालेंगे असर! चिड़चिड़ा होने लगें बच्चे तो करिए ये उपाय?

आज रात आसमान में दिखने वाला कोल्ड सुपरमून 2025 सिर्फ एस्ट्रोनॉमिकल नहीं, बल्कि सोशल मीडिया, पैरेंटिंग ग्रुप्स और घरों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है| आज यानी 4 दिसंबर की रात चांद पृथ्वी के सबसे नज़दीक होगा| और इसी वजह से कई माता-पिता का ये बड़ा सवाल हैं कि ‘क्या इस सुपरमून का असर हमारे बच्चों पर पड़ेगा?’
आइए जानते हैं साइंस क्या कहता है और असलियत में आपको क्या ध्यान रखना चाहिए।

सपरमून है क्या और इतना हाइप क्यों?

जब पूर्णिमा की रात को चांद अपनी कक्षा में घूमते हुए पृथ्वी के सबसे नज़दीक वाले बिंदु पर पहुंच जाता है, तो उसे ही सुपरमून कहते हैं| इस स्थिति में, चांद सामान्य पूर्णिमा से थोड़ा बड़ा और ज़्यादा चमकीला दिखाई देता है. चांद का पृथ्वी के सबसे नज़दीक होना पैरिजी कहलाता है|
जब पैरिजी की स्थिति पूर्णिमा के साथ मिलती है, तब हमें सुपरमून का शानदार नज़ारा देखने को मिलता है और इस ‘मार्गशीर्ष पूर्णिमा’ पर, चांद का आकार और ब्राइटनेस हल्की बढ़ेगी| लेकिन कोई जादुई बदलाव नहीं होता।

बच्चों पर असर? मिथ बनाम साइंस

पीढ़ियों से माना गया है कि पूर्णिमा या सुपरमून बच्चों को चिड़चिड़ा बना देता है और उन्हें नींद नहीं आती, वे ज़्यादा एक्टिव हो जाते हैं आदि, लेकिन साइंस इस बात से सहमत नहीं है| बड़े इंटरनेशनल स्टडीज कहती है की 12 देशों के लगभग 5,812 बच्चों पर हुई रिसर्च में पाया गया: कि पूर्णिमा की रात बच्चों की नींद औसतन सिर्फ 5 मिनट कम होती है| यानी लगभग 1% का फर्क बस!

बच्चों की एक्टिविटी, मूड या दिनभर का व्यवहार लगभग वैसा ही रहता है, जैसा बाकी दिनों में रहता है| साइंटिस्ट्स ने साफ कहा की ये बदलाव इतने छोटे हैं कि इन्हें असर कहना भी मुश्किल है|

चांद बदलता है रूप,बच्चे नहीं”
Adler Planetarium जैसे संस्थान साफ बताते हैं कि सुपरमून का असली असर केवल समुद्र की लहरों पर पड़ता है, इंसानी शरीर पर नहीं| कई बड़ी रिसर्च रिव्यूज़ भी यही दिखाती हैं कि मून साइकिल और बच्चों के बिहेवियर के बीच कोई भरोसे लायक कनेक्शन नहीं मिलता|
असल में चांद का ग्रेविटी हमारे शरीर पर इतना कम प्रभाव डालता है कि हमारी नींद, मूड या एक्टिविटी पर उसका असर होना लगभग नामुमकिन है। साइंटिस्ट्स का कहना है की बच्चों का ज्यादा एक्टिव या ‘हाइपर’ होना चाँद की वजह से नहीं, बल्कि उनकी अपनी एनर्जी और रूटीन की वजह से होता है।

पैरेंट्स के लिए प्रैक्टिकल टिप्स

रिसर्च कहती है की अगर आप सुपरमून नाइट पर थोड़ा सतर्क रहना चाहते हैं, तो बच्चे अगर देर तक जाग रहे हों, तो कमरे की रोशनी कम रखें. सोने से पहले उन्हें कैल्म रूटीन दें| जैसे स्टोरी टाइम, हल्का म्यूज़िक| और सबसे ज़रूरी डराने वाले मिथक न बताएं, ये बच्चे को मेंटल प्रेशर दे सकते हैं.
साइंटिस्ट्स ने बताया की कोल्ड सुपेर्मून 2025 का एक शानदार आसमानी नज़ारा है| लेकिन बच्चों के हेल्थ या मूड पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ता| अगर उनकी दिनचर्या ठीक है, स्क्रीन-टाइम बैलेंस्ड है और नींद का रूटीन सेट है. तो सुपरमून आपके लिए बस एक खुबसूरत रात बनेगा, न कि चिंता का कारण।

Chaturvedi Shruti V.

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