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LPG संकट का असर आपकी थाली तक — रेस्टोरेंट बंद, ऑर्डर कम और फीस ज्यादा… क्या Zomato यूजर्स के लिए आने वाला है महंगाई का नया दौर?

अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो क्या खाएं? का जवाब Zomato पर ढूंढते हैं, तो अब आपको अपने अगले ऑर्डर से जेब थोड़ी और ढीली करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए, देश में चल रहे LPG संकट और बढ़ती महंगाई के बीच, फूड डिलीवरी जाइंट Zomato ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस में 19% का तगड़ा उछाल कर दिया है।

प्लेटफॉर्म फीस 12.50 से बढ़कर हुई 14.90 रुपए


Zomato ने अपने ऐप पर प्लेटफॉर्म फीस को 12.50 रुपए से बढ़ाकर 14.90 रुपए (GST से पहले) कर दिया है। टैक्स 18% GST जोड़ने के बाद ग्राहकों को अब हर ऑर्डर पर लगभग 17.50 से 18 रुपए तक की फीस देनी होगी। दिलचस्प बात यह है कि यह फीस Zomato Gold मेंबर्स को भी देनी होगी, जिन्हें आमतौर पर डिलीवरी चार्ज से छूट मिलती है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?


कंपनी ने इस बढ़ोतरी के पीछे बढ़ते परिचालन खर्च (Operating Costs) का हवाला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे का कारण हैं: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने भारत की LPG सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है। ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ में ब्लॉकेज की वजह से कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दाम आसमान छू रहे हैं।
1- गैस की कमी से रेस्टोरेंट्स का खर्चा बढ़ गया है, जिसका असर सीधा ऐप की फीस पर दिख रहा है।

2- Zomato अब सिर्फ ‘सर्विस’ नहीं, ‘प्रॉफिट’ पर फोकस कर रहा है। 2023 में जो फीस 2 रुपए थी, वो आज 15 रुपए के पार पहुंच गई है।

रेस्टोरेंट्स और डिलीवरी पर ‘डबल मार’


देश के कई शहरों में जैसे बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कमी के कारण कई रेस्टोरेंट्स ने अपना मेनू छोटा कर दिया है या ऑनलाइन ऑर्डर्स लेना कम कर दिया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, गैस की कमी के कारण रेस्टोरेंट्स के बंद होने से डिलीवरी वॉल्यूम में 50-60% तक की गिरावट देखी गई है। ऑर्डर कम होने और ईंधन महंगा होने से डिलीवरी बॉयज की कमाई भी आधी रह गई है।

Swiggy का क्या है हाल?


Zomato की कॉम्पिटिटर कंपनी Swiggy भी पीछे नहीं है। वो वर्तमान में टैक्स सहित लगभग 14.99 रुपए की प्लेटफॉर्म फीस वसूल रही है। बाजार के जानकारों का कहना है कि जब एक बड़ी कंपनी दाम बढ़ाती है, तो दूसरी भी जल्द ही उसी राह पर चल पड़ती है।

एक्सपर्ट्स की राय


एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह ‘बॉइलिंग फ्रॉग’ (Boiling Frog) स्ट्रेटेजी जैसा है। कंपनियां धीरे-धीरे 1 या 2 रुपए बढ़ाती हैं ताकि ग्राहक को तुरंत झटका न लगे, लेकिन साल भर का हिसाब देखें तो यह आम आदमी की जेब पर बड़ा बोझ बन चुका है।

news desk

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