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मेरठ जिला अस्पताल में LPG संकट : क्या लकड़ी के चूल्हे पर बना मरीजों का खाना? जानें वायरल वीडियो की सच्चाई

मेरठ | 20 मार्च, 2026: उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसा चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। 19 मार्च को वायरल हुए इस वीडियो में जिला अस्पताल का रसोइया रसोई गैस (LPG) की कमी के कारण खुले में लकड़ी और गत्ते जलाकर मरीजों के लिए खाना बनाता दिख रहा है। रसोइये का आरोप है कि पिछले चार दिनों से अस्पताल में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई नहीं हुई है, जिसके कारण उसे इस मजबूरी में चूल्हा जलाना पड़ा।

मिडिल ईस्ट संकट का असर या प्रशासनिक लापरवाही?

बताया जा रहा है कि ईरान-इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण पश्चिम एशिया से गैस सप्लाई प्रभावित हुई है। इस वैश्विक संकट का असर अब मेरठ के अस्पतालों तक पहुँच गया है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण होटल और ढाबों के बाद अब स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

अधिकारियों के विरोधाभासी बयान: उलझ गया मामला

इस घटना के बाद प्रशासनिक अमले में खलबली मच गई है, लेकिन अधिकारियों के बयानों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है:

  • CMO अशोक कटारिया का पक्ष: उन्होंने स्वीकार किया कि समस्या संज्ञान में आई थी और जिला आपूर्ति अधिकारी से बात कर इसे सुलझा लिया गया है। उनके अनुसार, अब गैस की कोई किल्लत नहीं है।
  • DSO विनय कुमार सिंह का दावा: जिला आपूर्ति अधिकारी ने एलपीजी की कमी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि जिले में सप्लाई सामान्य है और अस्पताल को यह जांचनी चाहिए कि क्या सिलेंडर की बुकिंग समय पर की गई थी।
  • प्रशासनिक आश्वासन: डिप्टी कमिश्नर अजय कुमार ने स्पष्ट किया कि बुकिंग सिस्टम (WhatsApp, IVRS, ऐप) पूरी तरह चालू है और सप्लाई चेन में कोई बाधा नहीं है।

मरीजों और तीमारदारों में भारी रोष

अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में इस अव्यवस्था को लेकर गहरा गुस्सा है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि एक जिला स्तर के अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं जैसे खाना बनाने के लिए गैस उपलब्ध नहीं है, तो आम जनता का क्या हाल होगा।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है? (Why This Matters)

यह घटना केवल एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दो बड़े पहलुओं को दर्शाती है:

  1. प्रशासनिक समन्वय की कमी: एक विभाग समस्या मान रहा है जबकि दूसरा उसे नकार रहा है, जिससे आम जनता का भरोसा डगमगाता है।
  2. ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): वैश्विक युद्ध जैसी स्थितियों में हमारे अस्पतालों के पास वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuel) की क्या तैयारी है, यह एक बड़ा सवाल है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल

प्रशासन भले ही स्थिति नियंत्रण में होने का दावा कर रहा हो, लेकिन लकड़ी के चूल्हे पर बनता खाना सरकारी दावों की हकीकत बयां कर रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है, लेकिन मरीजों को समय पर और स्वच्छ खाना सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

news desk

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