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असम में ‘3 गोगोई फैक्टर’ पर टिका चुनाव! अपर असम में कांग्रेस को क्यों है बदलाव की उम्मीद?

असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए चुनावी शोर अब थम चुका है और 9 अप्रैल को 126 सीटों पर मतदान होना है। इस बार मुकाबला सिर्फ बीजेपी बनाम कांग्रेस नहीं, बल्कि बीजेपी की लगातार तीसरी सरकार की कोशिश और कांग्रेस के नए राजनीतिक प्रयोग के बीच है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी को लेकर काफी आश्वस्त दिख रही है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस बार रणनीति बदलते हुए कई छोटे लेकिन प्रभावशाली दलों को साथ जोड़कर ‘असम सम्मिलित मोर्चा’ बनाया है।


कांग्रेस का नया दांव: असम सम्मिलित मोर्चा

कांग्रेस ने इस बार अकेले लड़ने के बजाय राइजोर दल, असम जातीय परिषद, CPI(ML) और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस जैसे क्षेत्रीय दलों को साथ लिया है।

सीट शेयरिंग के तहत:

  • कांग्रेस: 100 सीटें
  • सहयोगी दल: 26 सीटें
  • राइजोर दल: 11 सीटें
  • असम जातीय परिषद: 10 सीटें

यह गठबंधन खास तौर पर उन सीटों पर फोकस कर रहा है जहां 2021 में वोट बंटने से बीजेपी को फायदा हुआ था।


तीन गोगोई फैक्टर से बदलेगा खेल?

इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू है “तीन गोगोई फैक्टर”।

इस बार एक साथ मैदान में हैं:

  • गौरव गोगोई (कांग्रेस)
  • अखिल गोगोई (राइजोर दल)
  • लुरिनज्योति गोगोई (असम जातीय परिषद)

तीनों नेताओं ने मिलकर खासतौर पर ऊपरी असम की 45 सीटों पर बीजेपी को घेरने की रणनीति बनाई है। यह इलाका अहोम समुदाय का मजबूत क्षेत्र माना जाता है और तीनों नेता इसी समुदाय से आते हैं।

यही वजह है कि इस क्षेत्र में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है।


2021 के आंकड़े बताते हैं क्यों अहम है यह गठबंधन

2021 के असम चुनाव में:

  • NDA वोट शेयर: 44.5%
  • विपक्षी गठबंधन: 43.7%
  • अंतर: सिर्फ 0.8%
  • सीटों का अंतर: 25 सीट

यानी वोटों का अंतर बेहद कम था, लेकिन सीटों में बड़ा फर्क आया।

सबसे अहम बात यह रही कि 14 ऐसी सीटें थीं जहां कांग्रेस हार गई, लेकिन राइजोर दल और असम जातीय परिषद को मिले वोट जीत के अंतर से ज्यादा थे।

यही वजह है कि कांग्रेस ने इस बार वोट कटवा फैक्टर खत्म करने के लिए दोनों दलों को साथ लिया है।


बीजेपी के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?

अगर बीजेपी इस बार अच्छे अंतर से जीतती है, तो असम भी पार्टी के लिए गुजरात, मध्य प्रदेश और हरियाणा जैसा मजबूत गढ़ बन सकता है।

हिमंत बिस्वा सरमा की छवि, संगठन की पकड़ और NDA का मजबूत बूथ नेटवर्क बीजेपी की ताकत है।

हालिया ओपिनियन पोल्स में भी NDA को बढ़त दिखाई गई है। कुछ सर्वे में NDA को 90+ सीटों तक मिलने का अनुमान जताया गया है।


राहुल गांधी और गौरव गोगोई की प्रतिष्ठा भी दांव पर

यह चुनाव सिर्फ राज्य की सत्ता का नहीं, बल्कि राहुल गांधी और गौरव गोगोई की राजनीतिक प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है।

कांग्रेस के लिए हिमंत बिस्वा सरमा को सत्ता से बाहर करना सिर्फ रणनीतिक जीत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश भी होगा।


Why This Matters

अगर कांग्रेस का तीन गोगोई + क्षेत्रीय दलों वाला प्रयोग सफल होता है, तो यह भविष्य में पूर्वोत्तर की राजनीति का नया मॉडल बन सकता है।

लेकिन अगर बीजेपी तीसरी बार जीतती है, तो यह साफ संकेत होगा कि हिमंत सरमा ने असम में पार्टी की पकड़ को स्थायी बना दिया है।


कल मतदान से पहले सबसे बड़ा सवाल

असम चुनाव 2026 में क्या मुख्य मुकाबला है?
मुख्य मुकाबला बीजेपी की तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश और कांग्रेस के तीन गोगोई व क्षेत्रीय दलों के गठबंधन के बीच है।

किस क्षेत्र पर सबसे ज्यादा नजर?
ऊपरी असम की 45 सीटों पर, जहां अहोम वोट निर्णायक माना जा रहा है।

news desk

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