टैरिफ से हाहाकार
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर नये सेक्टर में टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. वो 100 प्रतिशत टैरिफ. इस बार ट्रंप के निशाने पर है फार्मास्युटिकल सेक्टर. ट्रंप के ऐलान का असर भी दिखने लगा है. खासकर बात करें भारतीय बाजार की तो ट्रंप के ऐलान से बाजार में हाहाकार मच गया. पिछले 2 दिन से गिर रहा सेंसेक्स ट्रंप के फैसले से और गिरावट की ओर बढ़ रहा है. अरबिंदो, ल्यूपिन, डीआरएल, सन औऱ बायोकॉन जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर में गिरावट देखी जा रही है. हाल ही में भारतीय शेयर बाजार से एक झटके में करीब 4 लाख करोड़ रूपये स्वाहा हो गए थे. माना जा रहा है कि ट्रंप की टैरिफ नीति का सीधा असर भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है.
फार्मास्युटिकल दवाओं और अन्य प्रोडक्ट्स पर लगाये गये ये नये टैरिफ भारत समेत सभी देशों पर 1 अक्टूबर से लागू हो जायेंगे. ट्रंप के इस फैसले से जहां वैश्विक स्तर पर दवा कारोबार प्रभावित हो सकता है, वहीं भारत की दवा कंपनियों के लिए भी यह बड़ा झटका माना जा रहा है. क्योंकि भारत बड़े पैमाने पर अमेरिका को दवाओं का निर्यात करता है.
फार्मास्युटिकल सेक्टर पर ट्रंप की मार!
गुरूवार को ट्रंप ने कई उत्पादों पर भारी टैक्स लगाने की घोषणा करते हुए कहा कि ‘नए फैसले के मुताबिक फार्मास्युटिकल दवाओं पर 100 फीसदी, किचन कैबिनेट और बाथरूम वैनिटीज़ पर 50 फीसदी, अपहोल्स्टर्ड फर्नीचर पर 30 फीसदी तो वहीं भारी ट्रकों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा’.
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा कि 1 अक्टूबर 2025 से किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा उत्पाद पर 100% टैरिफ लागू होगा. हालांकि, जिन कंपनियों ने अमेरिका में फार्मा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना शुरू कर दी है या जिनके प्लांट निर्माणाधीन हैं, उन्हें इस नियम से छूट दी जाएगी. ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘ब्रेकिंग ग्राउंड’ या ‘अंडर कंस्ट्रक्शन’ की स्थिति में आने वाली कंपनियों पर यह टैरिफ लागू नहीं होगा.
ट्रंप ने कहा कि ‘विदेशी देशों से इन उत्पादों का बड़े पैमाने पर आयात बाढ़ की तरह हो रहा है, जो अमेरिकी उद्योग के लिए सही नहीं है’. उन्होंने जोर दिया कि ‘यह कदम केवल आर्थिक संतुलन के लिए नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू विनिर्माण को बचाने के लिए भी जरूरी है’.
क्या पड़ेगा भारत पर असर ?
अमेरिका, भारतीय दवाओं का सबसे बड़ा आयातक है और हर साल अरबों डॉलर की दवाएं भारत से वहां भेजी जाती हैं. भारतीय जेनेरिक दवाओं की अमेरिकी बाजार में काफी मांग है, क्योंकि ये सस्ती और गुणवत्ता में भरोसेमंद मानी जाती हैं. साल 2024 में भारत ने अमेरिका को कुल 31,626 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की दवाओं का निर्यात किया था. वहीं 2025 में अभी तक ही यह आंकड़ा बढ़कर 32,505 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, लेकिन ट्रंप प्रशासन द्वारा आयात पर अचानक इतना भारी टैरिफ लगाने से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा घट सकती है.
इसके साथ ही ट्रंप के इस कदम से अमेरिका में दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं और वहां के उपभोक्ताओं पर भी बोझ पड़ेगा. वहीं, भारत की बड़ी फार्मा कंपनियों जैसे सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैब्स और सिप्ला के मुनाफे पर सीधा असर पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल कारोबारी नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी है. ट्रंप प्रशासन लंबे समय से भारत समेत कई देशों पर व्यापार संतुलन को लेकर दबाव बनाता रहा है. यह टैरिफ उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.
क्या ट्रेड डील पर मनमानी करने के लिए ट्रंप ने बनाया दवाब?
भारत औऱ अमेरिका के बीच ट्रेड डील वार्ता जारी है. हाल ही दोनों देशों ने उम्मीद जताई थी कि जल्द ही ट्रेड डील डन हो जाएगी जो दोनों देश के लिए फायदेमंद होगी. लेकिन बातचीत के बीच फार्मास्युटिकल सेक्टर पर टैरिफ की घोषणा से भारतीय दवा बाजार में हड़कंप मचा हुआ है.
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