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गैस आउटेज से परेशान तेहरान,शरीफ यूनिवर्सिटी पर इजरायल का हमला… मस्जिद भी क्षतिग्रस्त, वीडियो में कैद हुई भयावह तस्वीर

तेहरान: सोमवार की सुबह ईरान की राजधानी तेहरान के लिए धमाकों की गूँज लेकर आई। अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने एक संयुक्त सैन्य अभियान के तहत तेहरान की प्रतिष्ठित शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और प्रमुख गैस वितरण केंद्रों पर जोरदार हवाई हमला किया। ईरानी स्टेट मीडिया (IRIB) ने पुष्टि की है कि इस हमले में यूनिवर्सिटी की इमारतों के साथ-साथ नागरिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है, जिससे शहर के कई हिस्सों में गैस सप्लाई ठप हो गई है।

शरीफ यूनिवर्सिटी और गैस स्टेशन बने मुख्य निशाना

हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि तेहरान के निवासियों ने घंटों तक लड़ाकू विमानों की आवाजें सुनीं। रिपोर्टों के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट 9 में स्थित शरीफ इलाके में गैस स्टेशन हिट होने के कारण गैस आउटेज की स्थिति पैदा हो गई है।

  • प्रभावित क्षेत्र: शरीफ यूनिवर्सिटी परिसर, पास की एक मस्जिद और डिस्ट्रिक्ट 9।
  • नुकसान: यूनिवर्सिटी की इमारतें, मस्जिद की छत और खिड़कियां क्षतिग्रस्त।
  • नागरिक सेवा: आपातकालीन टीमों द्वारा गैस सप्लाई बहाल करने की कोशिश जारी।

तेहरान के बाहर भी मची तबाही

इजरायली सेना ने दावा किया है कि उन्होंने तेहरान में “शासन से जुड़े रणनीतिक लक्ष्यों” पर हमलों की एक नई लहर को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। सिर्फ तेहरान ही नहीं, बल्कि क़ोम (Qom) और बहारिस्तान जैसे इलाकों से भी हमले की खबरें हैं। क़ोम के एक रिहायशी इलाके में कुछ मौतों की भी अपुष्ट खबरें सामने आ रही हैं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है।

ऑनलाइन मोड पर थी शरीफ यूनिवर्सिटी

बता दें कि शरीफ यूनिवर्सिटी ईरान की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग और साइंस संस्था मानी जाती है। युद्ध की स्थिति को देखते हुए यहाँ पहले से ही ऑनलाइन क्लासेस चल रही थीं, जिस वजह से एक बड़ा मानवीय हादसा टल गया। हालांकि, मिसाइल रिसर्च और एडवांस साइंस प्रोग्राम्स से जुड़े होने के कारण यह संस्थान हमेशा से ही इजरायल और अमेरिका की रडार पर रहा है।

यह हमला क्यों मायने रखता है? (Analysis)

पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ता यह तनाव केवल दो देशों के बीच की जंग नहीं है, बल्कि इसके वैश्विक परिणाम हो सकते हैं:

  • रणनीतिक महत्व: शरीफ यूनिवर्सिटी को ईरान के मिसाइल और तकनीकी विकास का केंद्र माना जाता है।
  • ऊर्जा संकट: गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला ईरान की आंतरिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश है।
  • बढ़ता तनाव: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों पर इस हमले का सीधा असर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक तेल कीमतें प्रभावित हो सकती हैं।

ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान ने इस हमले को “अमेरिकी-जियोनिस्ट आक्रामकता” करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है और ईरान इसका जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

news desk

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