लखनऊ: बिजली के बढ़ते बिल से राहत पाने और लंबे समय में बचत के लिए घर या दफ्तर की छत पर सोलर पैनल लगवाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। सरकार की सब्सिडी और सोलर सिस्टम की घटती लागत ने भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ाई है। लेकिन सोलर सिस्टम लगवाने की जल्दबाजी में अगर आपने कंपनी, जरूरी दस्तावेज और भुगतान से जुड़ी शर्तों की ठीक से जांच नहीं की, तो बाद में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सोशल मीडिया पर सोलर पैनल को लेकर कई तरह के आकर्षक ऑफर भी सामने आते रहते हैं। ऐसे में केवल विज्ञापन या मौखिक भरोसे के आधार पर किसी कंपनी या विक्रेता को भुगतान करना जोखिम भरा हो सकता है। सोलर सिस्टम लगवाने से पहले कंपनी की पूरी जानकारी जुटाने के साथ जरूरी दस्तावेजों की जांच करना बेहद जरूरी है।
सोलर पैनल लगवाने का फैसला करने के बाद सबसे पहले कंपनी या विक्रेता से कोटेशन या प्रोफार्मा इनवॉइस मांगें। इसमें सोलर पैनल, इनवर्टर, स्ट्रक्चर, वायरिंग, इंस्टॉलेशन और दूसरे सामान की कीमत अलग-अलग स्पष्ट होनी चाहिए।
इसके साथ कंपनी का नाम, जीएसटी बिल और बैंक खाते की जानकारी भी अच्छी तरह मिला लें। भुगतान से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जिस कंपनी या विक्रेता से सौदा किया जा रहा है, उसी के आधिकारिक खाते में रकम भेजी जा रही है।
सोलर सिस्टम खरीदते समय सिर्फ कीमत पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। कंपनी से इंस्टॉलेशन के बाद मिलने वाली वारंटी, एएमसी और सर्विस से जुड़ी शर्तों को लिखित रूप में जरूर लें।
पैनल और इनवर्टर की वारंटी अलग-अलग हो सकती है। इसलिए दोनों की वारंटी अवधि, नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ें। बाद में किसी खराबी की स्थिति में सर्विस कैसे मिलेगी और उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी पहले से स्पष्ट होना चाहिए।
अगर आप सरकार की सब्सिडी योजना के तहत सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं, तो रजिस्ट्रेशन और आवेदन से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर लें। कंपनी से यह भी स्पष्ट कर लें कि सब्सिडी से संबंधित प्रक्रिया में उसकी क्या जिम्मेदारी है और किन चरणों को ग्राहक को खुद पूरा करना होगा।
सिर्फ यह मान लेना कि सोलर सिस्टम लगते ही सब्सिडी मिल जाएगी, बाद में परेशानी की वजह बन सकता है। इसलिए भुगतान से पहले योजना से जुड़ी शर्तों और जरूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है।
सोलर सिस्टम लगवाने से पहले यह भी साफ कर लें कि नेट मीटरिंग और बिजली वितरण कंपनी यानी डिस्कॉम से जुड़ी प्रक्रिया कौन पूरी करेगा। इंस्टॉलेशन के बाद किसी अतिरिक्त काम या भुगतान की जरूरत पड़ेगी या नहीं, इसकी जानकारी पहले ही ले लें।
कई मामलों में इंस्टॉलेशन के बाद अतिरिक्त भुगतान की मांग सामने आ सकती है। इसलिए कंपनी से पहले ही लिखित रूप में स्पष्ट करा लें कि इंस्टॉलेशन और उससे जुड़ी सेवाओं की कुल लागत कितनी है और इसके बाद कोई अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा या नहीं।
सोलर पैनल लगवाने के लिए बिना दस्तावेज जांचे बड़ी रकम एडवांस में देना नुकसानदेह हो सकता है। कंपनी बदल जाने, इंस्टॉलेशन में देरी होने या सब्सिडी से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं होने की स्थिति में रकम वापस हासिल करना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए किसी भी भुगतान से पहले कोटेशन, बिल, वारंटी, सर्विस की शर्तें और इंस्टॉलेशन से जुड़ी जिम्मेदारियों को अच्छी तरह जांच लें। हर भुगतान की रसीद भी सुरक्षित रखें और संभव हो तो भुगतान कंपनी के आधिकारिक बैंक खाते में ही करें।
सोलर सिस्टम लंबे समय की बचत के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन खरीदारी से पहले थोड़ी सावधानी बड़ी आर्थिक परेशानी से बचा सकती है। कंपनी की जानकारी और दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही भुगतान करना समझदारी होगी।
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