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Instagram पर टीनेजर्स की सुरक्षा खतरे में: हर 5 में से 1 टीन यूजर के पास पहुँच रहा है “आफेंसिव कंटेंट”!

सोशल मीडिया जायंट Meta Instagram की पैरेंट कंपनी एक बार फिर विवादों के घेरे में है। हाल ही में आई Meta के एक इंटरनल रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है। डेटा के मुताबिक, Instagram पर हर 5 में से 1 टीनएजर (13-15 साल) की स्क्रीन पर उनकी मर्जी के बिना न्यूड या सेक्शुअल कंटेंट पॉप-अप हो रहा है, जो डिजिटल सेफ्टी पर एक बड़ा सवालिया निशान है।

कोर्ट लीक्स से बड़ा खुलासा
कैलिफोर्निया में चल रहे एक बड़े फेडरल लॉ-सूट (संघीय मुकदमे) के दौरान सामने आए अदालती दस्तावेजों ने Meta की पोल खोल दी है। इन लीक्स ने सोशल मीडिया सेफ्टी पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है:

रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 19% छोटे टीनएजर्स ने एक्सेप्ट किया कि Instagram पर उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ ऑफेंसिव कंटेंट का सामना करना पड़ा।

सर्वे में शामिल 8% टीनएजर्स ने बताया कि उन्होंने प्लेटफॉर्म पर किसी को खुद को नुकसान पहुँचाते या सुसाइड की धमकी देते देखा है।

Instagram हेड “एडम मोसेरी” का कहना है कि अधिकांश न्यूडिटी और टॉक्सिक मैसेज Direct Messages (DMs) के जरिए फैलते हैं, जिन्हें प्राइवेसी एन्क्रिप्शन की वजह से ट्रैक करना कंपनी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द है।

क्या टीनएजर्स सिर्फ ‘ग्रोथ टूल’ थे?
मुकदमे में सबसे गंभीर आरोप यह है कि Meta ने किशोरों को केवल यूजर नहीं, बल्कि “Catalysts” (ग्रोथ बढ़ाने वाला जरिया) माना। 2021 के एक इंटरनल मेमो के मुताबिक, कंपनी जानती थी कि टीन्स अपने छोटे भाई-बहनों और माता-पिता को भी ऐप पर लाने का पावर रखते हैं। इसीलिए उन्हें हुक करने के लिए ‘अग्रेसिव स्ट्रेटेजी’ अपनाई गई।

इन आरोपों पर सफाई देते हुए Meta ने कहा कि ये सर्वे 2021 का है और अब हालात बदल चुके हैं। कंपनी ने हाल ही में ‘Teen Accounts’ जैसे कड़े कदम उठाए हैं:

16 साल से कम उम्र के यूजर्स के अकाउंट अब ऑटोमैटिकली प्राइवेट रहेंगे। अब DMs में आने वाली आपत्तिजनक तस्वीरों को AI खुद-ब-खुद ब्लर कर देगा और माता-पिता अब ये ट्रैक कर पाएंगे कि उनका बच्चा किन लोगों के कांटेक्ट में है।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी
साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल फीचर्स बदलने से काम नहीं चलेगा। अमेरिका के कई राज्यों का सीधा आरोप है कि Meta के एल्गोरिदम जानबूझकर बच्चों को ‘एडिक्ट’ बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं, जो किशोरों में एंग्जायटी और डिप्रेशन की मेन वजह बन रहे हैं।

news desk

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