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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला… राज्यपाल के‘साइलेंट वीटो’ का अंत! विपक्षी सरकारों वाले राज्यों को सुप्रीम राहत

आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा फैसला सुनाया है जिसने विपक्ष-शासित राज्यों की ठंडी पड़ चुकी उम्मीदों में नई जान फूँक दी. जो मुख्यमंत्री महीनों से राज्यपाल की टेबल पर “सोए पड़े बिलों” को जगाने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें आज पहली बार असली राहत मिली है.

कहानी का ट्विस्ट – अब राज्यपाल नहीं खेल पाएंगे “साइलेंट गेम”


केरल, तमिलनाडु, बंगाल, पंजाब, दिल्ली… इन राज्यों की सरकारें महीनों से एक ही शिकायत दोहरा रही थीं: “हम बिल पास कर देते हैं, लेकिन राज्यपाल साहब उसे खोलकर देखते भी नहीं… महीने गुजर जाते हैं.”

सुप्रीम कोर्ट ने अब साफ कहा — “फैसला करना ही पड़ेगा! हाँ, ना, वापस भेजो या राष्ट्रपति को भेजो… लेकिन फाइल को अनंतकाल तक पार्क करके मत रखो.” यानी अब ‘साइलेंट वीटो’ की राजनीति खत्म.

लेकिन असली खेल यहां है…
अप्रैल में जब सुप्रीम कोर्ट ने 3 महीने की सख्त समय-सीमा का आइडिया सुझाया था, तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ही कोर्ट से सवाल पूछ लिया —
“क्या आप राज्यपाल को टाइम-लिमिट दे सकते हैं?”
आज पांच जजों की बेंच ने कहा — संविधान टाइम-सीमा नहीं बताता, इसलिए कोर्ट इसे जबरदस्ती लागू नहीं कर सकता. लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि राज्यपाल फाइल दबाकर बैठ जाएँ. देरी बेवजह है तो राज्य सरकार सीधे कोर्ट आएगी और कोर्ट राज्यपाल से फैसला देने के लिए कह सकता है.
हालांकि डीम्ड असेंट (अपने-आप मंजूरी) को कोर्ट ने “गलत” कहकर खत्म कर दिया.कोर्ट का कहना था कि इसका अर्थ हुआ राज्यपाल के स्थान पर कोई और उनकी भूमिका निभा रहा है जो कि गलत है.

विपक्षी राज्यों ने क्यों किया फैसले का स्वागत?

क्योंकि यह फैसला सिर्फ कानूनी नहीं… पूरी तरह राजनीतिक रियलिटी से जुड़ा हुआ है.

• केरल में शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण बिल महीनों रुके
• तमिलनाडु में गवर्नर-सरकार का पावर बैटल चलता रहा
• पश्चिम बंगाल में फाइलें धूल खाती रहीं
• पंजाब में कई बिल तो महीनों “फ्रिज मोड” में पड़े थे
• दिल्ली में तो गवर्नर-सरकार की खींचतान रोज का शो बन चुकी थी

आज के फैसले ने पहली बार साफ कर दिया कि “राज्यपाल सरकार को ब्लॉक करने का टूल नहीं हैं. वे लोकतंत्र में सहयोगी भूमिका निभाएँ, रुकावट बनने का अधिकार नहीं.” राज्यपाल अब बिना वजह फाइलें रोककर सरकार को ‘होल्ड’ पर नहीं रख पाएंगे और केंद्र–राज्य राजनीति में एक बड़ा संतुलन आएगा.

news desk

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