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Strait of Hormuz: होर्मुज जलडमरूमध्य में ‘समुद्री माइंस’ का खौफ, ईरान ने जारी की नई नेविगेशन गाइडलाइन, व्यापारिक जहाजों के बदले रास्ते

तेहरान/वॉशिंगटन। छह सप्ताह के भीषण तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बाद ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को अस्थायी रूप से खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा अभी टला नहीं है। ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए नई नेविगेशन एडवाइजरी जारी की है, जिसमें समुद्र में बिछी ‘खदानों’ (Mines) के प्रति आगाह किया गया है।

रूट में बड़ा बदलाव: लारक द्वीप बनेगा ‘सुरक्षा केंद्र’

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने समुद्री सुरक्षा को देखते हुए जहाजों के लिए नए प्रवेश और निकास मार्ग (Entry/Exit Routes) निर्धारित किए हैं:

  • प्रवेश मार्ग: ओमान सागर से आने वाले जहाजों को अब लारक द्वीप के उत्तर से होकर खाड़ी में प्रवेश करना होगा।
  • निकास मार्ग: खाड़ी से बाहर निकलने वाले जहाजों को लारक द्वीप के दक्षिण से होकर ओमान सागर की ओर बढ़ने के निर्देश दिए गए हैं।
    IRGC ने साफ किया है कि इन संशोधित मार्गों का उद्देश्य जहाजों को उन संभावित क्षेत्रों से बचाना है जहाँ समुद्री माइंस का खतरा हो सकता है।

अमेरिका-ईरान सीजफायर और ‘पाकिस्तान’ की भूमिका

मंगलवार को अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनी है। इस समझौते में पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यह सीजफायर इसी शर्त पर हुआ है कि ईरान वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए होर्मुज के रास्ते को फिर से सुचारू करेगा।

‘होर्मुज टोल टैक्स’: ईरान और ओमान के बीच ठनी?

  • इस युद्धविराम के बीच एक नया विवाद ‘शिपिंग चार्ज’ या शुल्क (Toll Fee) को लेकर खड़ा हो गया है।
  • ईरान का प्रस्ताव: ईरान ने संकेत दिया है कि भविष्य में इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाया जा सकता है।
  • ओमान का विरोध: रिपोर्टों के अनुसार, ओमान ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री समझौतों का उल्लंघन बताया है।
  • ट्रंप का रुख: दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रपति ट्रंप भी अब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की एक ‘संयुक्त व्यवस्था’ पर विचार कर रहे हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम है यह मार्ग?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘ऑयल चोकपॉइंट’ है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% (पांचवां हिस्सा) इसी 34 किलोमीटर चौड़े समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। इस मार्ग के आंशिक रूप से खुलने से अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद है।

news desk

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