मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच दुनिया की नजर इस समय एक बेहद अहम समुद्री रास्ते पर टिकी हुई है—Strait of Hormuz। हाल के दिनों में यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच भारत सरकार ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि तेल की आपूर्ति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है और देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी तरह सुरक्षित हैं।
केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए साफ कहा कि भारत का ऊर्जा आयात पूरी तरह सामान्य है। उन्होंने लिखा कि देश में ऊर्जा आयात सभी नॉन-होरमुज रूट्स से पूर्ण प्रवाह में जारी है और नागरिकों की जरूरतों को पूरा किया जा रहा है।
पत्रकारों से बातचीत में मंत्री पुरी ने कहा कि सरकार ने पहले से ही ऐसी रणनीति बना रखी है जिससे किसी भी वैश्विक संकट के बावजूद देश में तेल की उपलब्धता और कीमतों की स्थिरता बनाए रखी जा सके। उनके मुताबिक भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने तेल आयात के स्रोतों को काफी हद तक विविधीकृत कर लिया है।
सरकार का कहना है कि देश के पास कच्चे तेल और प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों—जैसे पेट्रोल, डीजल और एटीएफ—का पर्याप्त भंडार मौजूद है। रिफाइनरियों और रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व में कई हफ्तों का स्टॉक रखा गया है, जिससे किसी भी अल्पकालिक व्यवधान से आसानी से निपटा जा सकता है।
दरअसल मौजूदा तनाव की वजह मध्य पूर्व में बढ़ता संघर्ष है, जिसमें Iran, Israel और United States के बीच बढ़ते टकराव का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होरमुज को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग माना जाता है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। भारत के लिए भी यह मार्ग काफी महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि देश के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40-50 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी देशों—जैसे इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत—से इसी रास्ते से आता है।
इसी वजह से जब भी इस मार्ग में तनाव या अवरोध की खबर आती है, तो दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हलचल बढ़ जाती है।
हालांकि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब देश केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है। रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे कई क्षेत्रों से भी तेल आयात लगातार बढ़ाया गया है।
मंत्री पुरी के अनुसार यही कारण है कि अगर होरमुज मार्ग में कोई समस्या आती भी है तो भारत दूसरे रूट्स से अपनी जरूरतों को पूरा कर सकता है। सरकार ने हालात पर नजर रखने के लिए 24×7 कंट्रोल रूम भी सक्रिय कर रखा है, जहां से वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री मार्गों की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होरमुज 10-15 दिनों से अधिक समय तक बाधित रहता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी से उछाल आ सकता है। लेकिन भारत की तैयारियों को देखते हुए फिलहाल तत्काल संकट की स्थिति नहीं मानी जा रही।
मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने सोशल मीडिया संदेश में दोबारा भरोसा दिलाया कि भारत के ऊर्जा आयात पर कोई बड़ा खतरा नहीं है। उनका कहना है कि नॉन-होरमुज रूट्स से आयात पूरी गति से जारी है और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है।
कुल मिलाकर, जब वैश्विक ऊर्जा बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, तब भारत का यह संदेश साफ है—देश में तेल की आपूर्ति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वैकल्पिक स्रोत और पर्याप्त भंडार दोनों मौजूद हैं।
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