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महाराष्ट्र से बंगाल तक महाउलटफेर की आहट! उद्धव गुट के 6 सांसदों के पाला बदलने की चर्चा तेज, जानिए पूरा गणित

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों ने देश की सियासत का रुख पूरी तरह बदल दिया है। महायुति की बंपर जीत के बाद अब दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में एक नए और बड़े सियासी भूचाल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र की NDA सरकार लोकसभा में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए ‘मिशन 360’ पर काम कर रही है। इस मिशन के तहत विपक्ष के दो बड़े किलों महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की “UBT” और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की “TMC” में बड़ी दलबदल की तैयारी है।

लोकसभा में ‘विशेष बहुमत’ की तैयारी

पिछले संसद सत्रों के दौरान एनडीए सरकार को कुछ महत्वपूर्ण फैसलों और संविधान संशोधनों के लिए जरूरी टू- थर्ड- मेजोरिटी की कमी का सामना करना पड़ा था। इसी कमी को दूर करने के लिए अब एनडीए लोकसभा में सांसदों का आंकड़ा 360 के पार ले जाने की रणनीति बना रहा है। इसके लिए विपक्षी खेमे के असंतुष्ट सांसदों पर नजर रखी जा रही है।

6 सांसद छोड़ सकते हैं उद्धव का साथ

रिपोर्ट्स के मुताबिक सबसे बड़ा झटका उद्धव ठाकरे को लग सकता है। सियासी गलियारों में चर्चा आम है कि शिवसेना “UBT” के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।

 महाराष्ट्र चुनाव में एकनाथ शिंदे ने खुद को जमीनी स्तर पर असली ‘शिवसेना’ के रूप में साबित किया है। ऐसे में उद्धव गुट के कई सांसदों को लगता है कि उनका राजनीतिक भविष्य शिंदे के साथ ही सुरक्षित है। अरविंद सावंत और अनिल देसाई जैसे चुनिंदा वफादारों को छोड़कर बाकी सांसद पाला बदलने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।

दिल्ली की बैठक से उद्धव की दूरी ने दिए संकेत

इस बीच, दिल्ली में हुई ‘इंडिया’ गठबंधन की अहम बैठक से उद्धव ठाकरे और संजय राउत की दूरी ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। उद्धव ठाकरे इस बैठक में व्यक्तिगत रूप से शामिल होने के बजाय सिर्फ ऑनलाइन जुड़े थे। माना जा रहा है कि उद्धव इस समय दिल्ली से ज्यादा मुंबई में अपनी पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं।

आगे क्या होगा?

अगर यह उलटफेर हकीकत में बदलता है, तो एकनाथ शिंदे की लोकसभा में ताकत 7 सांसदों से बढ़कर 13 हो जाएगी, जिससे एनडीए का पलड़ा बेहद भारी हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर, संसद से लेकर सड़क तक ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए अपनी एकजुटता बचाए रखना एक बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। आने वाले कुछ दिन भारतीय राजनीति के लिए बेहद निर्णायक होने वाले हैं।

news desk

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