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‘हिंसा नहीं, संवाद से निकलता है समाधान’… धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अन्ना हजारे का बड़ा संदेश, सरकार को भी दी अहम सलाह

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्रों के आंदोलन समाप्त होने के बाद समाजसेवी अन्ना हजारे की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि किसी भी आंदोलन का स्थायी समाधान हिंसा से नहीं, बल्कि संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से निकलता है। अन्ना हजारे ने अपने लंबे जनआंदोलनों का हवाला देते हुए सरकार को भी जनता की बात सुनने और जनहित में समय रहते निर्णय लेने की सलाह दी।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्रों ने जंतर-मंतर पर चल रहा अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त कर दिया है। इसी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अन्ना हजारे ने शांतिपूर्ण आंदोलन की अहमियत पर जोर दिया।

22 अनशनों का दिया उदाहरण, अहिंसा को बताया सबसे बड़ी ताकत

मीडिया से बातचीत में अन्ना हजारे ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में जनहित के लिए 22 बार अनशन किए, लेकिन कभी हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक और अनुशासित आंदोलनों के जरिए ही देश में कई महत्वपूर्ण कानून बन सके और यही किसी भी जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत होती है।

उन्होंने कहा कि किसी भी सवाल या विवाद का समाधान हिंसा से नहीं निकलता, बल्कि बातचीत और आपसी समझ से रास्ता तैयार होता है।

सरकार को दी सलाह, जनता की मांगों को गंभीरता से सुनें

अन्ना हजारे ने सरकार और प्रशासन को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को सबसे पहले यह समझना चाहिए कि जनता की मूल मांग क्या है और उसके हित में क्या फैसला है। यदि जनहित में सरकार को दो कदम आगे बढ़कर निर्णय लेना पड़े, तो उससे पीछे नहीं हटना चाहिए।

उन्होंने दोहराया कि किसी भी व्यक्ति या संगठन के लिए हिंसा का रास्ता उचित नहीं है और हर परिस्थिति में शांतिपूर्ण तरीके से समाधान तलाशना ही लोकतंत्र की असली ताकत है।

धर्मेंद्र प्रधान के बाद प्रह्लाद जोशी को मिली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वीकार कर चुकी हैं। इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

इस्तीफे के बाद खत्म हुआ आंदोलन, खाली हुआ जंतर-मंतर

नीट पेपर लीक विवाद को लेकर पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी था। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक जुटे थे। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया और आंदोलनकारी जंतर-मंतर से लौट गए।

vineet verma

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