सियासी

‘देर आए, दुरुस्त आए’… धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर मुरली मनोहर जोशी की पहली प्रतिक्रिया, PM मोदी को भी दे डाली बड़ी सलाह

नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी का पहला बयान सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “देर आए, दुरुस्त आए”। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आगे की प्रक्रिया को लेकर सलाह दी। इस बीच जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों का आंदोलन समाप्त हो गया है और सरकार की ओर से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सहमति जताई गई है।

सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर अपनी शेष मांगों पर चर्चा की। इसके बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया।

‘देर आए, दुरुस्त आए’, जोशी ने इस्तीफे पर जताई संतुष्टि

मुरली मनोहर जोशी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “देर आए, दुरुस्त आए। धर्मेंद्र प्रधान ने त्यागपत्र दे दिया है।” उन्होंने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी समय की जरूरत के मुताबिक इस पूरे मामले में जल्द उचित निर्णय लेंगे।

छात्रों को दी बधाई, शिक्षा व्यवस्था में शांति की जताई उम्मीद

अपने संदेश में जोशी ने आंदोलन खत्म करने वाले छात्रों की भी सराहना की। उन्होंने लिखा कि शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन समाप्त करने वाले सभी छात्रों को बधाई। साथ ही उम्मीद जताई कि अब देश की शिक्षा व्यवस्था में जल्द सामान्य स्थिति लौटेगी और विद्यार्थियों को अपने भविष्य और प्रगति के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।

मनोहर लाल खट्टर बोले- इसे हार या जीत के नजरिए से न देखें

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कई बार परिस्थितियों का ऐसा समाधान जरूरी होता है, जिसका सकारात्मक अंत हो। उनके मुताबिक युवाओं की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी है और यदि उसी भावना को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है तो इसकी सराहना की जानी चाहिए।

खट्टर ने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार एक मुद्दा सामने आया था, जिसका समाधान हो गया है और अब आगे सकारात्मक माहौल बनना चाहिए।

शरद पवार ने बातचीत को बताया समाधान की वजह

एनसीपी-एससीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर छात्रों से संवाद शुरू करने का आग्रह किया था। उनका कहना था कि लोकतंत्र में बातचीत सबसे अहम होती है और संवाद न होने पर हालात बिगड़ते हैं।

पवार के मुताबिक उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा था कि या तो इस्तीफे पर फैसला लिया जाए या छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय मंत्रियों और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद जो परिणाम सामने आया, वह उसी प्रक्रिया का नतीजा है।

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