Trending News

2 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया बना सकता है बच्चे को मानसिक रूप से कमजोर! स्टडी में सामने आया बड़ा खतरा, माता-पिता जरूर पढ़ें

मेलबर्न: मोबाइल और सोशल मीडिया आज बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इसका बढ़ता इस्तेमाल अब चिंता का कारण बनता दिख रहा है। एक नई रिसर्च में सामने आया है कि दिन में 2 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। खास तौर पर 12 से 13 साल की उम्र सबसे ज्यादा संवेदनशील पाई गई है।

स्टडी में 1195 छात्रों को कई साल तक किया गया ट्रैक

इस रिसर्च को मेडिकल जर्नल ऑफ ऑस्ट्रेलिया में प्रकाशित किया गया। अध्ययन के दौरान 1195 छात्रों को 12 से 18 वर्ष की उम्र तक हर साल ट्रैक किया गया। शोध का उद्देश्य यह समझना था कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल बच्चों की मानसिक स्थिति को किस तरह प्रभावित करता है और क्या उम्र बढ़ने के साथ इसका असर बदलता है। रिसर्च में पारिवारिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा गया ताकि निष्कर्ष ज्यादा विश्वसनीय हो सकें।

2 घंटे से ज्यादा इस्तेमाल पर बढ़ा मानसिक समस्याओं का जोखिम

अध्ययन में पाया गया कि जो बच्चे और किशोर दिन में 2 घंटे से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं, उनमें अगले वर्षों में मानसिक परेशानियों का जोखिम ज्यादा देखा गया। इसके मुकाबले जो बच्चे 1 घंटे से कम सोशल मीडिया इस्तेमाल करते थे, उनमें यह खतरा अपेक्षाकृत कम पाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादा इस्तेमाल करने वाले बच्चों में उदासी, चिंता, मानसिक संतुलन में गिरावट और कुछ मामलों में खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार भी देखने को मिले।

12 से 13 साल की उम्र सबसे ज्यादा संवेदनशील

रिसर्च का सबसे अहम निष्कर्ष यह रहा कि सोशल मीडिया का असर सभी उम्र में एक जैसा नहीं होता। सबसे ज्यादा प्रभाव 12 से 13 साल की उम्र के बच्चों में दर्ज किया गया। लड़के और लड़कियां दोनों इस आयु वर्ग में ज्यादा संवेदनशील पाए गए।

अध्ययन के अनुसार इस उम्र में चिंता, अवसाद और मानसिक असंतुलन जैसी समस्याओं का जोखिम लगभग दोगुना तक देखा गया, जबकि बड़े किशोरों में यह असर अपेक्षाकृत कम रहा।

छोटा असर दिखता है, लेकिन बड़े स्तर पर चिंता की वजह

रिसर्च में बताया गया कि व्यक्तिगत स्तर पर असर सीमित दिखाई दे सकता है, लेकिन जब बड़ी संख्या में बच्चे सोशल मीडिया इस्तेमाल कर रहे हों तो इसका सामाजिक प्रभाव गंभीर हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, 12 से 13 वर्ष की उम्र की लड़कियों में हर 100 में करीब 11 अतिरिक्त मामलों में अवसाद के संकेत दर्ज किए गए।

क्या सिर्फ सोशल मीडिया पर रोक समाधान है?

अध्ययन में यह भी कहा गया कि केवल उम्र तय कर देना या प्रतिबंध लगा देना पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता। हालांकि कुछ देशों में कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लागू किए गए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसके साथ जागरूकता और डिजिटल शिक्षा भी जरूरी है।

माता-पिता और कंपनियों की भूमिका भी अहम

रिसर्च में सुझाव दिया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे फीचर्स और एल्गोरिदम पर ध्यान देना चाहिए जो बच्चों को लगातार स्क्रीन पर बनाए रखते हैं। साथ ही स्कूलों में डिजिटल जागरूकता बढ़ाने और माता-पिता को बच्चों की ऑनलाइन आदतों पर बेहतर निगरानी रखने की सलाह दी गई है।

एक अलग सर्वे में 2 हजार से ज्यादा माता-पिता शामिल हुए, जिनमें से 59 प्रतिशत ने माना कि बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम होना जरूरी है। बड़ी संख्या में माता-पिता अब 16 वर्ष की उम्र को सोशल मीडिया शुरू करने के लिए अधिक उपयुक्त मानने लगे हैं।

दुनियाभर में बढ़ रही बहस

बच्चों पर सोशल मीडिया के प्रभाव को लेकर अब कई देशों में बहस तेज हो रही है। चर्चा केवल इस बात तक सीमित नहीं है कि सोशल मीडिया नुकसान पहुंचाता है या नहीं, बल्कि इस पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि किस उम्र में इसका असर सबसे ज्यादा होता है और इससे बचाव कैसे किया जाए।

vineet verma

Recent Posts

IND vs WI: टीम इंडिया में बड़े बदलाव, पंत फिर बाहर; रोहित-कोहली की वापसी, 2 खिलाड़ियों को पहली बार मौका

वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी वनडे और टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान हो…

10 hours ago

नहाने के बाद भी क्यों आने लगती है पसीने की बदबू? सिर्फ परफ्यूम से नहीं बनेगी बात, इन 5 आदतों से पाएं राहत

नई दिल्ली: क्या नहाने के कुछ देर बाद ही आपके शरीर से पसीने की गंध…

10 hours ago

जंगल की देवी या विकास की जंग? सिद्धार्थ-तमन्ना की ‘द व्वान’ के ट्रेलर में दिखा रहस्यमयी वन, 25 सितंबर को होगी रिलीज

मुंबई: सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द व्वान’ का ट्रेलर रिलीज हो गया…

10 hours ago