इंफाल: मणिपुर में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। छह नागा लोगों की हत्या के बाद नागा संगठनों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है, जिसके चलते राष्ट्रीय राजमार्ग-2 (NH-2) पर आर्थिक नाकेबंदी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हालात को देखते हुए प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है।
बताया जा रहा है कि यह विरोध प्रदर्शन उन छह लियांगमाई नागा लोगों की हत्या के विरोध में शुरू हुआ, जिनका कथित तौर पर अपहरण किया गया था। प्रदर्शनकारी दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए इंफाल पश्चिम प्रशासन ने नामदुइलोंग क्षेत्र में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों की विशेष तैनाती की है। यही इलाका आर्थिक नाकेबंदी का मुख्य केंद्र बना हुआ है। पुलिस को आशंका है कि नाकेबंदी कर रहे लोग बड़ी संख्या में समर्थकों को इकट्ठा कर रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
जानकारी के अनुसार, छह लियांगमाई नागा लोगों का कथित तौर पर 13 मई को अपहरण कर लिया गया था। बाद में करीब एक महीने बाद उनके क्षत-विक्षत शव बरामद किए गए। आरोप है कि इस घटना में कुकी उग्रवादियों का हाथ हो सकता है। हालांकि, पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान करीब 40 स्थानीय स्वयंसेवक और मैतेयी महिलाओं का समूह नामदुइलोंग क्रॉसिंग पर वाहनों की आवाजाही पर नजर रखे हुए है। प्रदर्शनकारियों द्वारा इंफाल से कांगपोकपी जिले की ओर जाने वाले सामान और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को रोका जा रहा है। हालांकि, सुरक्षा बलों, आपातकालीन सेवाओं और सीमित संख्या में यात्री वाहनों को आने-जाने की अनुमति दी जा रही है।
नागा संगठनों का यह आंदोलन 5 जून से जारी है और अब अपने 28वें दिन में प्रवेश कर चुका है। पुलिस का कहना है कि नाकेबंदी कर रहे लोग इस आशंका में समर्थकों की संख्या बढ़ा रहे हैं कि प्रशासन कभी भी हाईवे खाली कराने की कार्रवाई कर सकता है।
दूसरी ओर, कुकी-जो समुदाय के लोगों ने भी 30 जून से कांगपोकपी जिले में जवाबी प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनकी मांग है कि इस महत्वपूर्ण अंतरराज्यीय मार्ग पर सामान्य यातायात जल्द से जल्द बहाल किया जाए।
इसी बीच गुरुवार तड़के इंफाल पूर्व जिले में एक और घटना सामने आई। टेलीकॉम उपकरण ले जा रहे एक वाहन को प्रदर्शनकारियों ने रोककर आग के हवाले कर दिया। आरोप लगाया गया कि वाहन में प्रतिबंधित सामान ले जाया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से वाहन को पहले ही वापस लौटने का निर्देश दिया गया था, लेकिन लौटते समय प्रदर्शनकारियों ने उसे घेर लिया और आग लगा दी।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति पर काबू पाया। हालांकि तब तक वाहन को काफी नुकसान पहुंच चुका था। मामले में केस दर्ज कर लिया गया है और आगजनी में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन ने कहा है कि हाईवे और आसपास के संवेदनशील इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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