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निर्वासन में रहते हुए शेख हसीना का यूनुस सरकार पर तीखा हमला, बताया ‘खूनी- फासीवादी’, लोकतंत्र बहाली का किया आव्हान!

नई दिल्ली : बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने निर्वासन में रहते हुए अपने पहले सार्वजनिक संबोधन में अंतरिम सरकार और उसके प्रमुख मुहम्मद यूनुस पर जमकर निशाना साधा है। दिल्ली से जारी एक ऑडियो संदेश में हसीना ने बांग्लादेशियों से अपील की कि वे यूनुस के नेतृत्व वाली इस “अवैध, फासीवादी और कठपुतली” सरकार का खुलकर विरोध करें। उनका आरोप है कि मौजूदा शासन देश को हिंसा, अराजकता और डर के माहौल की ओर धकेल रहा है।

हसीना ने यूनुस को “खूनी फासीवादी” बताते हुए कहा कि बांग्लादेश अब “आतंक के युग” में प्रवेश कर चुका है। उनके मुताबिक, अंतरिम सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। महिलाओं और लड़कियों पर हमले बढ़े हैं और हिंदू, बौद्ध, ईसाई व अहमदिया जैसे अल्पसंख्यक समुदाय लगातार निशाने पर हैं। उन्होंने दावा किया कि धार्मिक उग्रवाद को खुला संरक्षण मिल रहा है, जिसके चलते लूटपाट, भीड़ हिंसा और अल्पसंख्यकों की संपत्तियों पर कब्जे की घटनाएं आम हो गई हैं।

शेख हसीना ने बांग्लादेश को “रक्तरंजित” और “खाई के कगार पर” खड़ा बताया। उनका कहना था कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं है और देश की संप्रभुता को विदेशी हितों के हवाले किया जा रहा है। इसी के साथ उन्होंने एक 5-सूत्रीय रोडमैप भी रखा—जिसमें यूनुस प्रशासन को हटाकर लोकतंत्र बहाल करने, सड़क हिंसा पर तत्काल लगाम लगाने, महिलाओं व अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की “लोहे की गारंटी”, प्रेस की आज़ादी की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई, तथा विदेशी दबाव के खिलाफ संप्रभुता की रक्षा शामिल है।

यह संबोधन फरवरी में प्रस्तावित चुनावों से ठीक पहले आया है। हसीना ने आरोप लगाया कि डर का माहौल बनाकर अवामी लीग को चुनाव से बाहर रखने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अवामी लीग के बिना होने वाले चुनाव “नकली” होंगे और इससे देश में अस्थिरता और बढ़ेगी।

फिलहाल यूनुस सरकार की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि अंतरिम प्रशासन सुधारों और चुनावी तैयारियों पर जोर देता रहा है। बीते महीनों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों—मंदिरों पर तोड़फोड़ और संपत्ति लूट—की कई घटनाएं सामने आई हैं।

गौरतलब है कि अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद सत्ता से हटकर शेख हसीना भारत में शरण लिए हुए हैं। इस संबोधन से साफ है कि वे राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने वाली हैं और यूनुस सरकार के खिलाफ उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

news desk

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