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अमेरिका-ईरान की ‘महाजंग’ रोकने निकले शहबाज के मंत्री! तेहरान पहुंचे मोहसिन नकवी, सुप्रीम लीडर के लिए पाकिस्तान से आया ‘सीक्रेट लेटर’

पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भीषण तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला कूटनीतिक दांव खेला है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी अचानक ईरान की राजधानी तेहरान पहुंच गए हैं। उनके हाथ में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख (Army Chief) का एक ‘स्पेशल सीक्रेट लेटर’ है, जिसे सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई को सौंपा जाना है। आखिर इस बंद लिफाफे में ऐसा क्या है जो पूरी दुनिया की नजरें इस दौरे पर टिक गई हैं?

कुछ ही हफ्तों में तीसरी बार ईरान क्यों भागे नकवी?

ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तस्नीम’ के मुताबिक, मोहसिन नकवी का यह दौरा बेहद गोपनीय और संवेदनशील माना जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में नकवी की यह तीसरी ईरान यात्रा है।

तेहरान पहुंचते ही नकवी ने खुद खुलासा किया, “मैं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख का एक विशेष संदेश लेकर मुज्तबा खामेनेई के पास आया हूं।” जानकारों की मानें तो पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रही भीषण तनातनी को शांत कराने और दोनों महाशक्तियों के बीच बातचीत का रास्ता खोलने के लिए ‘ग्लोबल मीडिएटर’ (मध्यस्थ) की भूमिका निभा रहा है।

पर्दे के पीछे क्या है पाकिस्तान का असली प्लान?

इस दौरे से यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल डिप्लोमेसी (परदे के पीछे की बातचीत) को जिंदा रखना चाहता है। तेहरान पहुंचने पर ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी ने नकवी का स्वागत किया। इसके बाद नकवी की ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची सहित कई टॉप लीडर्स से मुलाकात होनी है।

दौरे से पहले PMO में हुई थी हाई-लेवल मीटिंग:

ईरान रवाना होने से ठीक पहले मोहसिन नकवी ने पीएम शहबाज शरीफ से वन-टू-वन मीटिंग की थी। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, इस बैठक में तेहरान मिशन को लेकर रणनीति तय की गई और पीएम शहबाज ने नकवी को कुछ बेहद जरूरी और गुप्त निर्देश दिए।

सीजफायर के बाद भी नहीं थम रहे हमले, मंडरा रहा है खतरा

यह पूरी कूटनीतिक हलचल ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम (Ceasefire) को दो महीने पूरे होने वाले हैं। दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू हुआ था, लेकिन इसके बावजूद छिटपुट हमले और तनाव लगातार बरकरार हैं।

“चूंकि अमेरिका और ईरान के बीच सीधे रिश्ते खत्म हैं, इसलिए दोनों देश विभिन्न मध्यस्थ देशों और कूटनीतिक रास्तों के जरिए एक-दूसरे तक संदेश पहुंचा रहे हैं। पाकिस्तान की यह नई पहल इसी कड़ी का सबसे बड़ा हिस्सा है।”

अब देखना यह होगा कि बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के बाद शुरू हुआ पाकिस्तान का यह ‘मिशन तेहरान’ अमेरिका और ईरान के बीच लगी सुलगती आग को बुझा पाता है या नहीं।

news desk

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