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पेपर माफिया पर शाह का वार: संसद से पास हुआ ‘एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल’, गृह मंत्री बोले- ‘युवाओं के सपनों से खिलवाड़ अब नामुमकिन’

Highlights

  • गृह मंत्री की मुहर: अमित शाह ने ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ के पारित होने पर जताया संतोष; बताया ऐतिहासिक कदम।
  • मेरिट की सुरक्षा: योग्यता के आधार पर तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य और सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की साख बचेगी।
  • कड़े दंडात्मक प्रावधान: संगठित पेपर लीक गैंग के खिलाफ 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का नियम लागू।

नई दिल्ली । देश के करोड़ों प्रतियोगी परीक्षार्थियों और मेधावी युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने संसद में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। संसद के दोनों सदनों से ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पास होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है।

विपक्ष के वॉकआउट के बीच राज्यसभा ने इस विधेयक को ध्वनि मत से मंजूरी दे दी, जबकि लोकसभा इसे बुधवार को ही पारित कर चुकी थी।

“योग्यता और मेरिट से खिलवाड़ करने वालों पर सबसे कड़ा प्रहार”

विधेयक के संसद में पास होने के तुरंत बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक विस्तृत पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार का यह फैसला देश के युवाओं की आकांक्षाओं को सुरक्षा प्रदान करेगा।

गृह मंत्री ने लिखा:

“मोदी सरकार ने संसद में इस संशोधित विधेयक को पारित कर छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया है। यह नया कानून उन अपराधों के खिलाफ सबसे मजबूत निवारक (Deterrent) साबित होगा, जो हमारी परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाते हैं। योग्यता के आधार पर मेहनत करने वाले युवाओं के सपनों से छेड़छाड़ करने वालों को अब सख्त से सख्त सजा मिलेगी।”

युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए कानून में क्या है खास?

संशोधित कानून का मुख्य उद्देश्य संगठित गिरोहों, कोचिंग संस्थानों और अधिकारियों के उस गठजोड़ को तोड़ना है जो पैसों के बदले पेपर लीक कराते हैं:

  • व्यक्तिगत धांधली/नकल पर कार्रवाई: परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने या प्रश्नपत्र लीक में शामिल व्यक्तियों को 5 से 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माना भुगतना होगा।
  • संगठित अपराध (पेपर माफिया/गैंग): संगठित रूप से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों के लिए कम से कम 7 साल की सजा (जो बढ़कर 10 साल हो सकती है) और न्यूनतम 10 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना तय किया गया है।

परीक्षा प्रणाली पर फिर बहाल होगा भरोसा

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में देश के कई राज्यों और राष्ट्रीय स्तर पर पेपर लीक की घटनाओं से लाखों अभ्यर्थियों का समय, संसाधन और मनोबल प्रभावित हुआ था। गृह मंत्रालय के अनुसार, इस नए कठोर कानून के लागू होने से न केवल दोषियों में खौफ पैदा होगा, बल्कि पारदर्शिता और योग्यता (Merit) पर आधारित चयन प्रक्रिया में अभ्यर्थियों का भरोसा फिर से कायम होगा।

news desk

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