भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार (6 मार्च 2026) को कारोबार की शुरुआत कमजोर माहौल में हुई और दिनभर बाजार पर दबाव बना रहा। शुरुआती संकेत ही कमजोर थे क्योंकि सुबह GIFT निफ्टी करीब 24,649 के आसपास ट्रेड कर रहा था, जिससे साफ था कि निफ्टी अपने पिछले बंद स्तर से नीचे खुल सकता है।
कारोबार के दौरान भी बाजार पर दबाव बना रहा। दोपहर के आसपास निफ्टी करीब 24,593 के स्तर पर और सेंसेक्स लगभग 79,390 के आसपास ट्रेड कर रहा था, यानी सेंसेक्स करीब 600 अंक से ज्यादा नीचे था। बैंकिंग शेयरों में कमजोरी और वैश्विक तनाव के कारण बाजार में गिरावट देखने को मिली।
इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार को बाजार ने अच्छी रिकवरी दिखाई थी और निफ्टी ने तीन दिन की गिरावट के बाद वापसी की थी। लेकिन शुक्रवार को निवेशकों का मूड फिर से सतर्क हो गया। इसकी बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और खासकर अमेरिका-ईरान टकराव से जुड़ी खबरें हैं, जिनका असर वैश्विक बाजारों पर भी दिख रहा है।
सबसे ज्यादा असर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से पड़ा है। हालिया घटनाओं के बाद ब्रेंट क्रूड लगभग 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है और पिछले एक हफ्ते में इसमें तेज उछाल देखा गया है। तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता बढ़ाती है और इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ता है।
सेक्टर की बात करें तो शुक्रवार को रियल्टी और बैंकिंग शेयरों में ज्यादा गिरावट रही, जबकि आईटी सेक्टर में हल्की मजबूती देखी गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक निफ्टी 24,400 के ऊपर बना रहता है, तब तक बड़ी गिरावट का खतरा सीमित रह सकता है। हालांकि वैश्विक तनाव और तेल की कीमतें फिलहाल बाजार की दिशा तय करने वाले सबसे बड़े फैक्टर बने हुए हैं।