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अमेरिका-ईरान डील में फिर अटका पेंच: ट्रंप ने मांगे बड़े बदलाव, यूरेनियम और होर्मुज स्ट्रेट पर सख्ती

अमेरिका और ईरान के बीच कई हफ्तों से चल रही अहम बातचीत अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते (Peace Deal) के ड्राफ्ट पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई महत्वपूर्ण संशोधन सुझाए हैं, जिससे डील को अंतिम रूप मिलने में देरी हो सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई उच्चस्तरीय बैठक के दौरान ट्रंप ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि समझौते के कुछ अहम बिंदुओं को और स्पष्ट तथा मजबूत किया जाए। खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संवर्धित यूरेनियम के भंडार को लेकर अमेरिका अतिरिक्त पारदर्शिता चाहता है।

यूरेनियम भंडार बना सबसे बड़ा मुद्दा

मौजूदा ड्राफ्ट में ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता जताई है, लेकिन ट्रंप प्रशासन इसे पर्याप्त नहीं मानता। अमेरिका यह जानना चाहता है कि ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम का क्या होगा, उसे कब और कैसे हटाया जाएगा, और उस पर अमेरिकी पहुंच कैसे सुनिश्चित होगी।

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, “मामला अब स्पष्ट शर्तों और समयसीमा का है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि अमेरिका उस सामग्री तक कब और कैसे पहुंच पाएगा।”

होर्मुज स्ट्रेट पर भी सख्त रुख

ट्रंप प्रशासन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी समझौते की भाषा में बदलाव चाहता है। अमेरिका का जोर है कि यह अहम समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए बिना किसी बाधा के खुला रहना चाहिए। हाल के तनावों ने वैश्विक तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर असर डाला है।

60 दिन की वार्ता अवधि, लेकिन अनिश्चितता बरकरार

प्रस्तावित समझौते के तहत 60 दिनों की एक अवधि तय की गई है, जिसमें परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण और संभावित प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दों पर विस्तार से बातचीत होनी है। हालांकि, यूरेनियम भंडार का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

डील कब होगी?

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि समझौता तय है, लेकिन समय को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। एक अधिकारी ने कहा, “डील होगी, इसमें कोई शक नहीं है। सवाल सिर्फ यह है कि कब।”

वहीं, ईरान की तरफ से प्रतिक्रिया आने में कुछ दिन लग सकते हैं, क्योंकि बातचीत सीधे नहीं बल्कि मध्यस्थों के जरिए हो रही है।

ईरान को क्या मिल सकता है?

ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस समझौते के तहत देश को विदेशों में फंसे अरबों डॉलर के फंड तक पहुंच मिल सकती है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी इन दावों की पुष्टि नहीं की है।

news desk

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