तेहरान/वाशिंगटन। इस्लामाबाद वार्ता की विफलता के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के ऐलान पर ईरान ने कड़ा और अनोखा पलटवार किया है।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने ट्रंप की सैन्य चेतावनी का जवाब कूटनीतिक बयानों के बजाय आर्थिक आंकड़ों से दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर व्हाइट हाउस के पास स्थित एक पेट्रोल पंप की तस्वीर साझा की, जिसमें ईंधन की बढ़ी हुई कीमतें साफ नजर आ रही थीं।
गालिबफ ने तंज कसते हुए कहा, “अमेरिकी जनता इन मौजूदा कीमतों को अच्छी तरह देख ले, क्योंकि अगर होर्मुज में दखलअंदाजी हुई, तो वे इन पुरानी कीमतों को केवल सुनहरी यादों की तरह याद करेंगे।”
ट्रंप का ‘होर्मुज की घेराबंदी’ का आदेश वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक सीधा खतरा है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है।
ट्रंप का रुख: अमेरिका का मानना है कि नाकेबंदी से ईरान की आर्थिक कमर टूट जाएगी।
ईरान का तर्क: ईरान इसे ‘आर्थिक आतंकवाद’ करार दे रहा है और उसका दावा है कि इसका सबसे बुरा असर अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब अमेरिका को सीधे सैन्य युद्ध के बजाय ‘महंगाई के जाल’ में उलझाना चाहता है। यदि होर्मुज का रास्ता बाधित होता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जो अमेरिकी चुनावों और घरेलू राजनीति के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
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