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केरल में CM पद पर कांग्रेस में घमासान, सतीशन-वेणुगोपाल-चेन्नितला में कड़ी टक्कर… कब तक होगा ऐलान?

केरल विधानसभा चुनाव जीतने के आठ दिन बाद भी कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है। ऐसे में अटकलों का बाजार गर्म है। जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही इस मामले को सुलझाना चाहता है। इसी को लेकर पार्टी ने केरल में अपने पूर्व अध्यक्षों, कुछ वरिष्ठ नेताओं और राज्य के कार्यकारी अध्यक्ष की बैठक दिल्ली में बुलाई है, ताकि जल्द किसी नतीजे पर पहुंचा जा सके।

केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी.एम. सुधीरन ने उम्मीद जताई है कि इस पर जल्द फैसला लिया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में होने वाली बैठक के बाद केरल की तस्वीर साफ हो सकती है। कांग्रेस चाहती है कि फैसला सामूहिक रूप से लिया जाए, ताकि किसी तरह का मतभेद पैदा न हो।

केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान तेज हो गई है। इस दौड़ में मुख्य रूप से वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्नितला शामिल हैं। तीनों नेताओं की मजबूत दावेदारी के चलते पार्टी अब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।

स्थिति इसलिए और जटिल हो गई है क्योंकि केसी वेणुगोपाल, जो फिलहाल विधायक नहीं हैं, उन्होंने भी सीएम पद पर दावा पेश किया है। वे कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व का अहम हिस्सा हैं और बताया जा रहा है कि नव-निर्वाचित विधायकों में से कई का समर्थन उन्हें हासिल है।

कांग्रेस नेतृत्व इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कई दौर की चर्चा कर चुका है, लेकिन तीनों दिग्गजों के अपने-अपने रुख पर कायम रहने से सहमति बनना मुश्किल हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि तीनों नेताओं के समर्थक खुले तौर पर अपने-अपने दावेदार के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं और पोस्टर-बैनर लगाए जा रहे हैं।

वीडी सतीशन के समर्थकों का कहना है कि जनता का समर्थन उनके साथ है और उन्होंने चुनाव में पार्टी का नेतृत्व भी किया है।

वहीं, केसी वेणुगोपाल को कांग्रेस नेतृत्व में राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। यही वजह है कि पार्टी के भीतर उनका कद मजबूत माना जा रहा है। हालांकि, AICC के कुछ नेताओं का मानना है कि अगर वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो इससे यह संदेश जा सकता है कि केंद्रीय नेतृत्व का झुकाव किसी एक नेता की ओर है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि यदि केसी वेणुगोपाल को चुना जाता है, तो यह सवाल उठ सकता है कि एक गैर-विधायक को प्राथमिकता क्यों दी गई। ऐसे में यह तर्क भी सामने आ सकता है कि चुनाव में नेतृत्व करने वाले वीडी सतीशन को मौका दिया जाना चाहिए।

news desk

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