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संजय जोशी को लेकर बढ़ी आरएसएस और बीजेपी के बीच दूरी? RSS शताब्दी समारोह में पीएम मोदी की गैरमौजूदगी क्यों बनी चर्चा का विषय?

पीएम नरेन्द्र मोदी और RSS सरसंघचालक मोहन भागवत के बीच दूरी बढ़ने को लेकर अक्सर चर्चाएं सुनी जाती है. लेकिन आधिकारिक तौर पर कभी भी इन दोनों सगंठनों से जुड़े लोगों का कोई बयान नहीं आया. लेकिन राजनीति में सिर्फ बयान ही मायने नहीं रखते. एक्ट से भी कई बातें निकलती हैं. जैसी आरएसएस स्थापना के शताब्दी समारोह में देखा गया.

1 और 2 अक्तूबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दो कार्यक्रम आयोजित हुए. 1 अक्तूबर को आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी संघ के शताब्दी समारोह में शामिल हुए. उन्होने इस अवसर पर एक डाक टिकट भी जारी किया. इस कार्यक्रम में आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबोले समेत कई लोग मौजूद थे लेकिन मोहन भागवत वहां नहीं थे.

इसके बाद गुरुवार, 2 अक्टूबर को नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100वें स्थापना दिवस का भव्य कार्यक्रम नागपुर के रेशमबाग मैदान में आयोजित हुआ. इस दौरान कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति नहीं रही.

इसे लेकर ही कयास लगाए जा रहे हैं कि पीएम मोदी और आरएसएस चीफ मोहन भागवत के बीच क्या दूरी आ चुकी है और अगर ये दूरी है तो इसका कारण क्या हो सकता है? चर्चाओं की माने तो बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद को लेकर अनिश्चितता बनी हुई हैं. यूट्यूब पर कई वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार मोहन भागवत चाहते हैं कि संजय जोशी को बीजेपी का अगला अध्यक्ष बनाया जाए. लेकिन संजय जोशी के संबंध पीएम मोदी से बेहतर नहीं हैं. इसीलिए इस पद के लिए संजय जोशी के नाम पर एकराय नहीं बन पा रही है.

इससे पहले मोदी और मोहन भागवत के बिगड़ते संबंध तब सुर्खियों में आए थे, जब हाल ही में पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन से पहले मोहन भागवत ने अपने बयान में कह दिया था कि 75 वर्ष की उम्र में नेताओँ को रिटायर हो जाना चाहिए. मोहन भागवत के इस बयान को पीएम मोदी से जोड़ कर देखा गया था, हालांकि बाद में भागवत ने अपने बयान पर सफाई दी थी.

इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का वो बयान भी सुर्खियों में आया था जिसमें उन्होने कहा था कि ‘बीजेपी अब बड़ी हो गई है और वह सक्षम है, अब उसे आरएसएस की जरूरत नहीं है. पहले हमें आरएसएस की जरूरत होती थी, लेकिन आज पार्टी अपने दम पर चलने में सक्षम है’. तब आरएसएस के प्रवक्ता सुनील आंबेकर ने इसे पारिवारिक मामला बताया था.

news desk

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