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इस धर्मगुरू ने SEX एनर्जी पर ये क्या बोल दिया…लड़कियों को शादी से पहले SEX…

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सेक्स को लेकर समाज में आज भी खुलकर बात करने से लोग बचते हैं। कई लोग इसे निजी विषय मानकर चर्चा से किनारा कर लेते हैं।

लेकिन यही चुप्पी और झिझक गलतफहमियों को जन्म देती है, और अधूरी जानकारी कई बार नुकसानदेह भी साबित होती है। स्कूलों, घरों और समाज में सेक्स एजुकेशन को अब भी शर्म और वर्जना के चश्मे से देखा जाता है, जिसके कारण युवाओं तक सही जानकारी पहुंच ही नहीं पाती। ऐसे माहौल में लोग स्वाभाविक सवाल पूछने से हिचकते हैं और इंटरनेट या अफवाहों से गलत व असुरक्षित जानकारी का सहारा लेते हैं।

दूसरी ओर, सेक्स को लेकर खुली और स्वस्थ चर्चा न केवल आवश्यक है, बल्कि समाज के लिए फायदेमंद भी साबित होती है। हालांकि इसके बीच कई लोग गंभीर विषयों पर भी विवादित या असंगत बयान देकर चर्चाओं में बने रहने की कोशिश करते हैं। हाल के दिनों में कुछ धर्मगुरुओं ने भी ऐसे मुद्दों पर अजीबोगरीब टिप्पणियाँ की हैं।

ताज़ा मामला बिलासपुर के आध्यात्मिक गुरु परम आलय का है, जिनके बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी। उन्होंने विवादित उदाहरण देते हुए कहा कि “हम जब गाड़ी खरीदते हैं तो पहले उसे चलाकर देखते हैं, चलाना सीखते हैं”, और इस तुलना को सेक्स-एनर्जी से जोड़ने की कोशिश की।

उन्होंने अपने भाषण में यह भी दावा किया कि सेक्स-एनर्जी के “सदुपयोग” को समझाना ज़रूरी है और कहा कि पश्चिमी सोच ने शरीर को ऊपर और नीचे दो हिस्सों में बाँटकर नीचे वाले हिस्से को ‘गंदा’ मान लिया है, जबकि भारतीय परंपरा में इस विषय पर खुलकर चर्चा की जाती रही है।

इससे पूर्व पद्मविभूषण संत रामभद्राचार्य के एक हालिया बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी . एक कार्यक्रम में उन्होंने हिन्दी और अंग्रेजी भाषा की तुलना करते हुए कहा, ‘वाइफ’ और ‘पत्नी’ शब्दों का अंतर बताते हुए कहा कि ‘WIFE’ का अर्थ “Wonderful Instrument For Enjoy” होता है. उन्होंने आगे कहा, अंग्रेजी में “एंजॉयमेंट के लिए खिलौना है वाइफ.”

इसके बाद उन्होंने ‘पत्नी’ शब्द को संस्कृत से जोड़ते हुए कहा “यज्ञ में जो स्त्री अपने पति का साथ दे, वही पत्नी कहलाती है.” सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होते ही कई लोगों ने इसे महिला विरोधी और अपमानजनक बताया.

हालांकि उनके बयान की सबसे विवादित बात यह रही कि उन्होंने किशोरावस्था में आने वाले बदलावों को आधार बनाकर यह संकेत दिया कि “उम्र आने पर” सेक्स को लेकर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सेक्स एनर्जी का सदुपयोग सिखाना जरूरी है। हमे पश्चिम ने सिखाया है।

शरीर दो हिस्से में है, नीचे का गंदा और ऊपर का अच्छा, लेकिन हिन्दुस्तान ने इस पर खुलकर चर्चा की. बाबा की बात माने तो सेक्स की उम्र होते ही सेक्स में करने में कोई बुराई नहीं है।

परम आलय ने अपनी बात को उदाहरण देकर समझाने की कोशिश की और कहा हम जब गाड़ी लेते हैं तो पहले चलाकर देखते हैं, चलाना सीखते हैं।” इतना ही नहीं उन्होंने सेक्स को पूजनीय बता दिया। सेक्स एनर्जी पर बात करते हुए उन्होंने दावा किया कि युवाओं को इसकी समझ और प्रशिक्षण देना जरूरी है। बाबा के इन बयानों का वीडियो सामने आने के बाद मामला विवाद का विषय बन गया है।

news desk

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