मुंबई: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने करीब चार साल बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। 7 अक्टूबर को आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 फीसदी कर दिया। इस फैसले का सीधा असर कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है और होम लोन, कार लोन व पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। इससे ग्राहकों की ईएमआई पर भी असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, इसका एक दूसरा पहलू बैंक में एफडी कराने वाले ग्राहकों के लिए राहत देने वाला हो सकता है।
रेपो रेट बढ़ने के बाद सिर्फ लोन की लागत ही नहीं बढ़ती, बल्कि बैंक की जमा योजनाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है। कर्ज महंगा होने के बीच बैंकों को ज्यादा जमा की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बैंक बचत योजनाओं और खासकर फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं।
हालांकि, रेपो रेट बढ़ने के तुरंत बाद एफडी की ब्याज दर में बदलाव जरूरी नहीं है। बैंक आमतौर पर अपनी फंड की जरूरत, जमा की स्थिति और बाजार की परिस्थितियों को देखते हुए दरों में बदलाव करते हैं। इसलिए इसका असर धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है।
रेपो रेट वह दर है जिस पर आरबीआई बैंकों को पैसा उधार देता है। जब इसमें बढ़ोतरी होती है तो बैंकों के लिए फंड जुटाने की लागत बढ़ जाती है। ऐसे माहौल में बैंक अपने पास ज्यादा जमा जुटाने की कोशिश कर सकते हैं और इसके लिए एफडी जैसी योजनाओं पर बेहतर ब्याज दर की पेशकश कर सकते हैं।
हालांकि, हर बैंक का फैसला एक जैसा नहीं होता। बैंक अपनी फंड की जरूरत, जमा की मांग और बाजार की स्थिति के आधार पर एफडी की ब्याज दर तय करते हैं। इसलिए यह जरूरी नहीं कि आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाते ही अगले दिन सभी बैंकों की एफडी दरें भी बढ़ जाएं।
रेपो रेट में बदलाव के बाद छोटे बैंक अक्सर जमा बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में अपेक्षाकृत जल्दी बदलाव कर सकते हैं। ज्यादा जमा जुटाने की जरूरत होने पर वे ग्राहकों को एफडी के जरिए आकर्षित करने की कोशिश करते हैं।
इसके मुकाबले बड़े बैंक आमतौर पर ब्याज दरों में बदलाव धीरे-धीरे करते हैं। इसलिए आरबीआई के फैसले के बाद अलग-अलग बैंकों की एफडी दरों में बदलाव का समय अलग हो सकता है।
मौजूदा स्थिति में ज्यादातर सरकारी बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर करीब 6.30 से 6.65 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं। वहीं निजी बैंकों और छोटे वित्तीय बैंकों की कुछ एफडी योजनाओं पर ब्याज दर इससे अधिक हो सकती है।
ऐसे में अगर आप आने वाले समय में एफडी कराने की योजना बना रहे हैं तो रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद बैंकों की नई ब्याज दरों पर नजर रखना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, एफडी कराने का फैसला बैंक की दर, अवधि और आपकी जरूरत के हिसाब से ही करना चाहिए।
रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का असर कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए कर्ज की लागत बढ़ सकती है। खासकर जिन लोन की ब्याज दर रेपो रेट से जुड़ी होती है, उनकी ईएमआई पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
वहीं एफडी निवेशकों के लिए तस्वीर अलग हो सकती है। बैंकों की ओर से जमा पर ब्याज दर बढ़ाए जाने पर नई एफडी कराने वाले ग्राहकों को पहले के मुकाबले बेहतर रिटर्न मिल सकता है। हालांकि, इसका फायदा कब और कितना मिलेगा, यह संबंधित बैंक के अगले ब्याज दर संशोधन पर निर्भर करेगा।
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