पाकिस्तान को AMRAAM मिसाइल सौंपने पर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा
हाल ही में अमेरिका ने अपनी प्रमुख रक्षा कंपनी रेथियॉन के साथ हुए एक महत्वपूर्ण अनुबंध में संशोधन किया है, जिसके तहत पाकिस्तान को AMRAAM (Advanced Medium-Range Air-to-Air Missile) मिसाइलें उपलब्ध कराई जाएंगी. इसकी जानकारी अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा 30 सितंबर 2025 को जारी की गई. यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है, खासकर भारत के लिए, जो इस मिसाइल तकनीक के पाकिस्तान को मिलने को गंभीर चुनौती के रूप में देख रहा है.
AMRAAM मिसाइलें अत्याधुनिक और हाईटेक हवा से हवा मार करने वाली मिसाइलें हैं, जिनका इस्तेमाल लड़ाकू विमान दुश्मन के हवाई हमलों को रोकने और उन्हें निशाना बनाने के लिए करते हैं. यह मिसाइलें हवा में बेहद सटीकता और गति के साथ दुश्मन के विमान को ट्रैक और नष्ट करने की क्षमता रखती हैं. इस तकनीक के पाकिस्तान को मिलने से न केवल उसकी वायु शक्ति में प्रगति होगी, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी यह एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है.
कांग्रेस पार्टी ने जताया विरोध, सरकार से माँगा जवाब
कांग्रेस के महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने इस कदम को भारत के लिए एक गंभीर कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी नुकसान बताया है. उन्होंने केंद्र सरकार से इस बारे में स्पष्टता और जवाबदेही मांगी है कि क्या सरकार इस फैसले को लेकर अमेरिकी पक्ष से किसी प्रकार की चर्चा या विरोध व्यक्त कर रही है. कांग्रेस का तर्क है कि अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को इस तरह की उन्नत सैन्य तकनीक की सप्लाई भारत के सुरक्षा हितों और विदेश नीति के खिलाफ है.
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाए हैं कि अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को इतनी संवेदनशील मिसाइल तकनीक देने का क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा. साथ ही यह भी पूछा गया है कि भारत इस परिस्थिति में अपनी रणनीतिक सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित करेगा और अपने हितों की रक्षा के लिए क्या कूटनीतिक या सैन्य कदम उठाएगा.
यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों में एक नई चुनौती के रूप में उभरा है, क्योंकि भारत को न केवल अपनी सुरक्षा की दृष्टि से सतर्क रहना होगा, बल्कि अपने कूटनीतिक संबंधों और क्षेत्रीय रणनीतियों को भी पुनः मजबूत बनाना होगा. इस परिस्थिति में भारत के लिए आवश्यक होगा कि वह अपनी रक्षा नीति को और सुदृढ़ करे और अमेरिका के साथ बातचीत के माध्यम से अपनी चिंताओं को स्पष्ट रूप से रखे. साथ ही क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर सामूहिक सुरक्षा रणनीतियां विकसित करना भी अहम होगा.
इस पूरे हालात में यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान को रेथियॉन की AMRAAM मिसाइलें मिलने से न केवल भारत की रक्षा चुनौतियां बढ़ेंगी, बल्कि यह दक्षिण एशिया में सुरक्षा समीकरण को भी पेचीदा बनाएगा. भारत के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह अपने कूटनीतिक और सैन्य दृष्टिकोण को मजबूत करते हुए, क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हो जाए.
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