इस्लामाबाद: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से सामने आए एक बड़े घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज कर दी है। लापता लोगों के मुद्दे को लेकर लंबे समय से सक्रिय डॉ. महरंग बलोच को पाकिस्तानी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। फैसले के बाद मानवाधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बलूचिस्तान की स्थिति को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
डॉ. महरंग बलोच पिछले कई वर्षों से उन परिवारों की आवाज बनकर सामने आई थीं, जिनका दावा है कि उनके परिजन अचानक लापता हो गए और आज तक उनका कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका। इसी वजह से उन्हें कई लोग ‘बलूचिस्तान की शेरनी’ के नाम से भी पहचानने लगे।
रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की आतंकवाद-रोधी अदालत ने डॉ. महरंग बलोच और उनके सहयोगी सिबगतुल्लाह शाह को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला 2024 में ग्वादर में हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा बताया गया है, जहां एक पैरामिलिट्री जवान की मौत हुई थी। अदालत ने उन्हें आतंकवाद, देशद्रोह और हत्या जैसे आरोपों में दोषी माना।
हालांकि महरंग और उनके समर्थकों ने इन आरोपों को खारिज किया है। परिवार का कहना है कि फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जाएगी।
महरंग बलोच की यह लड़ाई सिर्फ सामाजिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत भी मानी जाती है। बताया जाता है कि उनके पिता अब्दुल गफ्फार लैंगोव 2009 में लापता हो गए थे। उस समय महरंग किशोरावस्था में थीं। कई वर्षों बाद परिवार को उनके पिता के शव की सूचना मिली।
इस घटना के बाद उन्होंने बलूचिस्तान में कथित तौर पर लापता लोगों और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभानी शुरू की। धीरे-धीरे वह इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा बन गईं।
बलूचिस्तान लंबे समय से राजनीतिक तनाव, अलगाववाद और सुरक्षा अभियानों के कारण चर्चा में रहा है। मानवाधिकार समूहों और स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप रहा है कि बीते वर्षों में बड़ी संख्या में लोग गायब हुए हैं।
दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है। सरकार का कहना है कि कई मामलों में लोग उग्रवादी संगठनों से जुड़ गए या क्षेत्र छोड़कर चले गए। सरकार का यह भी दावा रहा है कि लापता लोगों के हजारों मामलों में बड़ी संख्या में जांच पूरी की जा चुकी है।
महरंग पेशे से डॉक्टर हैं, लेकिन बाद में उन्होंने सामाजिक और जन-अभियान गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने विरोध प्रदर्शन, लंबी यात्राएं और सार्वजनिक अभियानों के जरिए बलूचिस्तान के मुद्दों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की कोशिश की।
बताया जाता है कि उन्होंने महिलाओं और परिवारों के साथ लंबी पदयात्राएं भी निकालीं और कथित जबरन गायब किए गए लोगों के मामलों में जवाबदेही की मांग की।
सजा के बाद महरंग के परिवार ने फैसले पर सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि मुकदमे की प्रक्रिया को चुनौती दी जाएगी और कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं समर्थकों का मानना है कि यह मामला अब पाकिस्तान में असहमति और मानवाधिकार बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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