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राहुल गांधी ने दिखाई नरावणे की अप्रकाशित मेमॉयर, कहा– ‘सच्चाई सामने आने से घबराई सरकार’

नई दिल्ली: नई दिल्ली में बुधवार को संसद परिसर के बाहर सियासी पारा उस वक्त चढ़ गया, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी हाथ में एक किताब लेकर मीडिया के सामने आ गए। राहुल गांधी ने दावा किया कि यह पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरावणे की अप्रकाशित मेमॉयर है, जिसमें 2020 के भारत-चीन सैन्य टकराव, खासकर लद्दाख की घटनाओं का पूरा ब्योरा लिखा है। राहुल ने इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उस मुश्किल वक्त में पीएम ने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई।

आज बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने किताब दिखाते हुए कहा कि स्पीकर कह रहे हैं कि यह किताब मौजूद ही नहीं है और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी यही बात दोहरा रहे हैं। राहुल का कहना था कि यह खुद नरावणे जी की किताब है, जिसमें उन्होंने लद्दाख में जो कुछ हुआ, उसे साफ-साफ लिखा है। राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने उस समय सेना प्रमुख से कह दिया था कि “जो चाहें कर लें” और नरावणे जी ने अपनी किताब में लिखा है कि उस दौर में उन्हें खुद को “बहुत अकेला” महसूस हुआ। राहुल ने कहा कि सरकार इस किताब से घबराई हुई है, क्योंकि इससे मोदी जी और रक्षा मंत्री की भूमिका पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर पीएम आज लोकसभा में आएंगे, तो वे खुद उन्हें यह किताब ‘Four Stars of Destiny’ सौंप देंगे। साथ ही तंज कसते हुए बोले कि उन्हें नहीं लगता कि प्रधानमंत्री में आज सदन में आने की हिम्मत होगी।

यह विवाद सोमवार को शुरू हुआ था, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान राहुल गांधी ने ‘द कारवां’ मैगजीन के एक लेख का हवाला देते हुए इस अप्रकाशित मेमॉयर से उद्धरण पढ़ने की कोशिश की। सरकार और स्पीकर ने इसे अप्रकाशित सामग्री बताकर रोक दिया, नियम 349 का हवाला दिया गया और सदन बार-बार स्थगित हुआ। कई विपक्षी सांसदों को निलंबित भी किया गया।

राहुल गांधी का कहना है कि किताब विदेश में मिल रही है, लेकिन भारत में इसे छापने की इजाजत नहीं दी जा रही। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे जानें कि यह किताब मौजूद है, चाहे सरकार इससे इनकार करे। इस पूरे मामले ने संसद में सियासी तनाव और बढ़ा दिया है। कांग्रेस इसे गलवान संघर्ष में सरकार की नाकामी से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इसे सदन की मर्यादा तोड़ने का मामला बता रही है।

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