मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2024 के परिणामों के बाद शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक संग्राम में बदल गया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए छात्रों के भविष्य के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की है।
प्रियंका गांधी ने क्या कहा?
प्रियंका गांधी ने x पर ट्वीट करते हुए भाजपा सरकार की नीतियों और नीयत पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
एक बार फिर से NEET UG की परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी को लेकर खबरें छप रही हैं। भाजपा राज में पिछले कई साल से परीक्षाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार देश के युवाओं से उनका भविष्य छीन रहा है। इस बार भी तकरीबन 23 लाख छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।
NEET जैसी परीक्षाओं के लिए बच्चे जी-जान से मेहनत करते हैं। माता-पिता अपना सबकुछ दांव पर लगाते हैं ताकि बच्चों का भविष्य बने। लेकिन हर परीक्षा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है। संसद में पेपर लीक के खिलाफ लाये गये कथित सख्त कानून का क्या फायदा हुआ अगर ज़मीनी तौर पर वही भ्रष्टाचार जारी है?
प्रधानमंत्री जी देश के युवाओं के प्रति जवाबदेह हैं। युवाओं का भविष्य बर्बाद करने का यह सिलसिला कब तक चलेगा?

कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 4 जून को परीक्षा के नतीजे आए। छात्रों और विशेषज्ञों ने परिणामों में कई ऐसी इर्रेगुलैरिटीज़ पकड़ीं जो पहले कभी नहीं देखी गई थीं:
NEET UG की परीक्षा में पहली बार 67 छात्रों ने 720 में से 720 नंबर प्राप्त किए। इनमें से कई छात्र एक ही परीक्षा केंद्र से थे। कुछ छात्रों के 718 और 719 अंक आए। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा की मार्किंग स्कीम के अनुसार यह नंबर लाना टेक्निकली असंभव है।
NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) ने क्लियर कर दिया कि उन्होंने ‘समय की बर्बादी’ के बदले कुछ छात्रों को ग्रेस मार्क्स दिए हैं। हालांकि, यह ग्रेस मार्क्स किस आधार पर और कितने छात्रों को दिए गए, इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
परीक्षा के दिन ही बिहार और राजस्थान जैसे राज्यों से पेपर लीक की खबरें आई थीं, जिन्हें उस वक्त NTA ने सिरे से खारिज कर दिया था।
प्रियंका गांधी के इस बयान ने अब इस तकनीकी विवाद को एक बड़ा जन-आंदोलन बना दिया है। देश भर के छात्र और अभिभावक अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं और परीक्षा की निष्पक्ष जांच या फिर से परीक्षा कराने की मांग कर रहे हैं।